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एयर कंडिशनर का काम करेगी स्मार्ट विंडो

वाशिंगटन (प्रेट्र)।घरों और दफ्तरों में तापमान को सही रखने के लिए पंखे, एयर कंडिशनर आदि का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे एक तरफ जहां बिजली की अत्याधिक खपत हो रही है, वहीं दूसरी तरफ एयर कंडिशनर से निकलने वाली गैसें पर्यावरण को हानि भी पहुंचा रही हैं। कैसा हो अगर इन विद्युत उपकरणों के बिना ही तापमान को सही रखा जा सके। अब इसका विकल्प वैज्ञानिकों ने तलाश लिया है।

दरअसल, वैज्ञानिकों ने एक किफायती और अगली पीढ़ी का स्मार्ट कांच तैयार करने में सफलता हासिल कर ली है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे तैयार खिड़कियों के जरिए कमरों के तापमान को मौसम के मुताबिक समायोजित किया जा सकता है। इको फ्रेंडली तरीके से कमरे का तापमान ठीक रखने वाला यह कांच प्रकाश की उतनी ही मात्रा को अंदर आने देता है, जितनी आवश्यकता होती है। यह कांच सर्दियों में ऊष्मा को अवशोषित करके उसे कमरे के अंदर आने देता है, जबकि गर्मी में ऊष्मा को अंदर प्रवेश करने से रोक देता है।

इस तरह बिना एयर कंडिशनर के जरिए ही कमरों का तापमान ठीक रखा जा सकता है। इसे तैयार करने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस स्मार्ट ग्लास की टेक्नोलॉजी के पीछे बहुत ही आसान सा सिद्धांत है। इस कांच को प्लास्टिक की दो अलग और पतली परतों से बनाया गया है।

इस तरह करता है काम

प्लास्टिक में छोटे घन आकार की संरचनाएं होती हैं, जो मैटीरियल को रेट्रोरिफ्लेक्टिव बनाता है। इसका मतलब है कि गर्मी में यह प्रकाश को उसके स्रोत की तरफ बाहर फेंकता है। इसके बाद इन परतों के बीच के स्थानों में तरल पदार्थ भर जाता है, जिसे मिथाइल सैलिसिलेट कहते हैं। यह एक सस्ता तरल पदार्थ है, जिसका इस्तेमाल दर्द निवारक क्रीम में किया जाता है। जब इन सबको साथ लाया जाता है तो कांच पारदर्शी बन जाता है और प्रकाश इससे होकर गुजर सकता है। इस प्रक्रिया को रेफरैक्टिव इंडेक्स मैचिंग कहते हैं। इस तरह एक कांच दो तरह से काम करने लगता है।

इस तरह करता है काम

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस स्मार्ट ग्लास को हजारों बार पारदर्शी से रिफ्लेक्टिव और रिफ्लेक्टिव से पारदर्शी में बदला जा सकता है। ऑप्टिक्स एक्सप्रेस नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, इस स्मार्ट ग्लास से तैयार खिड़कियों के जरिये घरों और दफ्तरों के तापमान को समायोजित किया जा सकता है।

सोच से बेहतर आए परिणाम:-अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर में एसोसिएट प्रोफेसर कीथ गोससेन के मुताबिक, हमने जब इसकी जांच की तो इसके परिणाम हमारी सोच से भी बेहतर थे। जब ऐसा ग्लास तैयार करने के लिए हमने सोचा था, तब इसके परिणामों का अनुमान लगाया गया था। जांच करने पर इसके वास्तविक परिणाम उस अनुमान से भी बेहतर रहे हैं। अब हम इसकी अंतिम रूप से जांच कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि जल्द ही ये आमजन के उपयोग के लिए उपलब्ध हो सकेगा।