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मस्तिष्क प्रशिक्षण से बच सकते हैं डिस्लेक्सिया से

लंदन (प्रेट्र)।पढ़ने, लिखने या बोलने से संबंधित विकार डिस्लेक्सिया से बचाने के वैज्ञानिक निरंतर बेहतर तरीके तलाशते रहते हैं। इसी कड़ी में किए गए एक अध्ययन के बाद विशेषज्ञों ने कहा है कि मस्तिष्क प्रशिक्षण के जरिए इस विकार से बचा जा सकता है। अध्ययन में कहा गया है कि मस्तिष्क के उन हिस्सों का लगातार प्रशिक्षण बेहद जरूरी है, जो लिखने, पढ़ने या बोलने की क्रिया के लिए जिम्मेदार होते हैं।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, बोलने में परेशानी महसूस करने वाले डिस्लेक्सिया के मरीजों के लिए ध्वनि और मस्तिष्क के बीच तारतम्य बनाना बेहद जरूरी होता है। स्पेन स्थित बास्क सेंटर ऑन कॉग्निशन, ब्रेन एंड लैंग्वेज (बीसीबीएल) के शोधकर्ताओं ने 72 से अधिक डिस्लेक्सिया के मरीजों के आंकड़ों के अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला है।

किस तरह होता है विकार

प्रमुख शोधकर्ता निकोला मोलिनारो के मुताबिक, भाषा को समझने और उसे बोलने के लिए मस्तिष्क को प्रशिक्षित करने वाले हिस्से का ध्वनि के साथ सामंजस्य होना बेहद जरूरी होता है। अध्ययन में पता चला है कि समकालीन होने पर मस्तिष्क के भाषा से संबंधित हिस्से अधिक संवेदनशील हो जाते हैं और उन्हें प्रतिक्रिया करने में समय नहीं लगता है। इस हिस्से को ब्रोका कहते हैं और यह मस्तिष्क के सामने की ओर बाईं तरफ होता है।

इस तरह किया अध्ययन

शोधकर्ताओं ने दो अलग-अलग अध्ययन किए। एक में 35 और दूसरे में 37 डिस्लेक्सिया के मरीजों को शामिल किया गया। अध्ययन के दौरान सभी को छह मिनट तक अलग-अलग वाक्य सुनाए गए। इसके बाद उनके मस्तिष्क की तरंगों और सक्रियता की जांच की गई। इसमें सामने आया कि सुनने के बाद उसे बोलने का प्रयास करने से मस्तिष्क की तरंगें अधिक सक्रिय हो जाती हैं। इस प्रकार के टास्क को दोहराने से मस्तिष्क को निरंतर सक्रिय रखा जा सकता है।

इस तरह किया अध्ययन

शोधकर्ताओं ने लंबे अध्ययन के बाद देखा कि निरंतर ऐसा प्रशिक्षण करने वाले इस विकार से बाहर आते हुए दिखाई दिए। शोधकर्ताओं के मुताबिक, पढ़ने, लिखने और बोलने में परेशानी वाले इस विकार से बचने का सबसे अच्छा और किफायती तरीका यही है कि मस्तिष्क को अधिक से अधिक व्यस्त रखा जाए। उसे सक्रिय रखने के साथ उसे निरंतर प्रशिक्षित किया जाए। इस तरह से इस विकार से बचा जा सकता है।