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नासा के क्यूरियोसिटी रोवर की अहम खोज, कभी मंगल ग्रह पर भी रहा है जीवन

वाशिंगटन (आइएएनएस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल की तीन अरब साल पुरानी चट्टानों में कार्बनिक अणुओं की खोज की है। इन अणुओं ने लाल ग्रह पर कभी जीवन होने के मजबूत संकेत दिए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि नई खोज के बाद लग रहा है जैसे खुद मंगल हमसे वहां पर जीवन की तलाश जारी रखने के लिए कह रहा है।

कार्बनिक अणुओं का मिलना रोमांचक

नासा के वैज्ञानिक पॉल महाफी का कहना है, 'अणुओं का मिलना बहुत ही रोमांचक है। अभी हालांकि यह नहीं पता चला है कि ये किस तरह बने थे? कार्बनिक अणु आमतौर पर जैविक क्रिया से ही बनते हैं और इनमें ऑक्सीजन व कार्बन समेत कई पदार्थ मौजूद होते हैं। इसी वजह से इनका मिलना लाल ग्रह पर जीवन का संकेत हो सकता है। लेकिन यह भी संभव है कि ये अणु किसी उल्का पिंड या अन्य स्त्रोत से मंगल पर पहुंचे हों।'

वैज्ञानिकों का अनुमान

इन अणुओं के गैर जैविक तरीके से बनने की संभावना के बावजूद वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस तरह के अणु मंगल के सूक्ष्मजीवों का आहार रहे होंगे। नासा के गोडार्ड स्पेस सेंटर की वैज्ञानिक जेनिफर इगेनब्रॉड ने उम्मीद जताई है कि अरबों साल पुराने कार्बनिक अणुओं के मिलने से मंगल पर जीवन की खोज में सहायता मिलेगी। वर्तमान में पृथ्वी के इस पड़ोसी ग्रह का वातावरण जीवन की उत्पत्ति के लिए लायक नहीं है। लेकिन 2012 से मंगल पर पड़ताल में जुटे क्यूरियोसिटी रोवर ने वहां प्राचीन काल में पानी होने के कई सबूत ढूंढे हैं। रोवर से जुटाए डाटा के अनुसार अरबों साल पहले वहां पानी की एक झील थी। आने वाले समय में पानी, अणुओं व अन्य संकेतों के बारे में और जानकारी हासिल कर मंगल पर जीवन का पता लगाया जाएगा।

रोवर लेकर आया पत्‍थरों के बुरादे

31 मई को एक अतिरिक्त तकनीक ‘फीड एक्सटेंडेड सैंपल ट्रांसफर’ के जरिए पत्थरों के बुरादे को सफलतापूर्वक इस क्‍यूरियोसिटी रोवर में लाया गया ताकि वाहन पर मौजूद खनिज विज्ञान प्रयोगशाला में उसका प्रसंस्करण किया जा सके। इस बुरादे को क्यूरोसिटी की रासायनिक प्रयोगशाला तक अगले हफ्ते ले जाया जाएगा।

रोवर लेकर आया पत्‍थरों के बुरादे