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कोलकाता : बंगाल का केंद्र पर बकाया है 900 करोड़

कोलकाता :केंद्र सरकार पर 900 करोड़ रुपये बकाया है. केंद्र सरकार की संस्था फुड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआइ) के पास चावल नहीं है और विभिन्न जिलों में आइसीडीएस, मिड डे मील व डब्ल्यूबीएनपी योजना के तहत बंगाल सरकार एफसीआइ को चावल प्रदान कर रही है. इस तरह से कुल 9 सौ करोड़ केंद्र पर बकाया हो गया है, लेकिन एफसीआइ असहयोगिता कर रही है और बकाये रुपए भी नहीं दे रही है. ये बातें राज्य के खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने कहीं.

शनिवार को खाद्य साथी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि बंगाल पिछले कई वर्षों से धान उत्पादन में अव्वल रहा है. चावल के लिए केन्द्र सरकार की संस्था एफसीआइ ने बंगाल सरकार से झारखण्ड, तामिलनाडू और केरल तीन राज्यों के लिए चावल मांगे है. इसके लिए खाद्य विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को पत्र भेजा गया है. हमलोग चावल देने के लिए राजी है लेकिन राज्य की मुख्यमंत्री से परामर्श लेने के बाद ही फैसला लिया जायेगा. नवान्न में फाइल भेजी गयी है. वहां से लिये गये निर्णय के बाद ही फैसला किया जायेगा. बंगाल फिलहाल आठ लाख मैट्रिक टन चावल ही दे सकता है. एफसीआइ पर असहयोगिता का आरोप : एफसीआइ पर असहयोगिता का आरोप लगाते हुए राज्य के खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने कहा कि जब चावल मांगे जा रहे हैं, तो बंगाल सरकार चावल दे रही है, लेकिन एफसीआइ लेने में भी असहयोगिता कर रहा है. बर्दवान में चार दिन पहले ही एफसीआइ के कुछ स्टाफ मिल कर राइस मिल के कुछ लोगों को बंद करके रखे थे. उन्होंने कहा कि वजह यह है कि एफसीआइ के कुछेक लोग प्रत्येक राइस सप्लाई वाले ट्रक से रुपए लेना चाहते है, जिसे लेकर राइस मिल वाले

उन्होंने कहा कि भारत के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा चावल का उत्पादन बंगाल में ही होते आ रहा है. एफसीआइ की वजह से बंगाल सरकार को ऋृण लेने पड़े, जिसका प्रति माह चार लाख 38 हजार रुपये देना पड़ रहा है, लेकिन रुपये मांगने पर कई बार पत्र में जवाब दिया गया है कि केन्द्र सरकार के पास पैसे नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत का कोई भी राज्य दो रुपए किलो चावल नहीं मिलता है लेकिन सिर्फ बंगाल में सरकार लोगों को दो रुपये किलो चावल देती है. मिड डे मील और आइसीडीएस में चावल नहीं दे पा रहा एफसीआइ इस कदर बढ़ते गया बंगाल का लक्ष्य दिसम्बर 2017 तक बंगाल का लक्ष्य 3 लाख 40 हजार मैट्रिक टन धान संग्रह का था, जो बंगाल ने करीब छह लाख 35 हजार मैट्रिक टन धान संग्रह किया. जनवरी 2018 तक सिर्फ 9 लाख 60 हजार मैट्रिक टन का लक्ष्य था, जबकि जनवरी 2018 तक पूरे पूरे साल का लक्ष्य करीब 14 लाख 84 हजार मैट्रिक टन था, जो कि 15 लाख 3 हजार मैट्रिक टन धान संग्रह किये गये. अभी जनवरी के अंतिम छह दिन में प्रत्येक दिन 40 हजार मैट्रिक टन करके संग्रह किया जा रहा है. राज्य के कुल तीन लाख किसानों से ये धान संग्रह किये गय

मंत्री ने कहा कि एफसीआइ मिड डे मील और आइसीडीएस योजना में चावल नहीं दे पा रहा है. गत नवंबर में ही 57 हजार 629 मैट्रिक टन चावल एफसीआइ को बंगाल ने दिया. फिर से दिसंबर, जनवरी और फरवरी के लिए 42 हजार मैट्रिक टन चावल की मांग की गयी है, उसे भी शुक्रवार से ही देने का प्रयास किया जा रहा है. हमलोग सहयोग कर रहे हैं, लेकिन वे सहयोग नहीं कर रहे हैं. मिड डे मील और आइसीडीएस योजना को संचालित करने के लिए एफसीआइ को 70 प्रतिशत चावल देना पड़ता है, लेकिन इस साल एफसीआइ फेल साबित हुई है. हर जिले में गोदाम मंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले में गोदाम बनाये जायेंगे. फिलहाल उत्तर बंगाल में जोरशोर से काम चल रहा है. वहां के कुछेक जिलों में 126 गोदाम बनाये जा चुके हैं.