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अयोध्या विवाद : 1985 में राजीव गांधी ने खुलवाया था ताला, जानें कब, क्या हुआ

अयोध्या विवाद पर आज से सुप्रीम कोर्ट में निर्णायक सुनवाई प्रारंभ हो रही है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में दोपहर दो बजे से तीन जजों की बेंच इसपर सुनवाई करेगी. वर्ष 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में विवादित स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा के बीच तीन बराबर भागों में बांटने का आदेश दिया था. कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गयी है, जिसपर अब निर्णायक फैसला होना है. अयोध्या विवाद देश का एक ऐसा विवाद है, जिसपर पूरे देश की नजरें टिकी हैं, तो आइए जानें क्या है अयोध्या विवाद और कब-कब क्या हुआ इस विवाद में:-

1. हिंदुओं की पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मस्थली है और उसी जगह पर मुगल शासक बाबर ने 1528 में मस्जिद का निर्माण करवाया. 2. चूंकि हिंदुओं की यह मान्यता है कि यहां मंदिर थे, जिसे तोड़कर बाबर ने मस्जिद का निर्माण करवाया, इसलिए यह मसला वर्षों से विवाद का कारण रहा है और सबसे पहले 1853 में यहां सांप्रदायिक दंगे हुए. 3. हिंदू-मुसलमानों के बीच विवाद को शांत करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने तार की बाड़ से घेराबंदी करके विवादित स्थल के बाहर और अंदर अलग-अलग जगहों पर दोनों धर्मों के लोगों को पूजा-नमाज की इजाजत दे दी. 4. सबसे पहले 1885 में राममंदिर के निर्माण की मांग उठी और यह मांग करने वाले थे महंत रघुवर दास. इन्होंने फैजाबाद की अदालत में बाबरी मस्जिद के निकट एक राम मंदिर के निर्माण के लिए अपील दायर की. 5. वर्ष 1949 में लगभग 50 हिंदुओं ने विवादित स्थल पर भगवान राम की मूर्ति रख दी और पूजा शुरू कर दी, इस घटना के बाद मुसलमानों ने वहां नमाज पढ़ना बंद कर दिया और सरकार ने विवादित स्थल पर ताला लगवा दिया. 6. वर्ष 1950 में गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद अदालत म

19. विवादित ढांचा गिराये जाने की घटना के बाद 1992 में लिब्रहान आयोग का गठन हुआ. 20. वर्ष 2002 में विवाद सुलझाने के लिए तात्कालीन प्रधानमंत्री ने एक अयोध्या विभाग शुरू किया. 21. वर्ष 2002 के अप्रैल माह में अयोध्या के विवादित स्थल पर हक को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की. 22. इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व विभाग ने अयोध्या में खुदाई की, जिसमें मस्जिद के नीचे मंदिर होने के प्रमाण मिलें, लेकिन मुसलमानों ने इसे स्वीकार नहीं किया. 23 : वर्ष 2003 में अदालत ने विवादित ढांचा गिराने के लिए उकसाने वाले भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित सात नेताओं को सुनवाई के लिए बुलाया. 24. गठन के 17 साल बाद लिब्रहान आयोग ने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को 2009 में सौंपी. 25. 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित स्थल को तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया. एक हिस्सा रामलला विराजमान, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड को और तीसरा निर्मोही अखाड़े को देने का आदेश दिया गया. 26. इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर

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