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जीएसटी के आइटीसी में 46 करोड़ का घोटाला, 33 कंपनियां शामिल

कानपुर (राजीव सक्सेना)। केंद्रीय गुड्स एंड सर्विस टैक्स (सीजीएसटी) ने 46 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) घोटाला पकड़ा है। इसमें 33 कंपनियों ने 13 करोड़ रुपये का घोटाला स्वीकार भी कर लिया है। 13 अन्य कंपनियों ने 33 करोड़ का घोटाला किया है। ये कंपनियां मांगने पर भी विभाग को कागजात नहीं दे रही हैं।उधर जीएसटी के ई-वे बिल पोर्टल ध्वस्त होना व्यापारियों के लिए बिल्ली के भाग्य से छींका फूटने जैसा हो गया है। कहां तो गुरुवार तक हर बार माल भेजने के लिए ई-वे बिल डाउनलोड करने के झंझट से लेकर माल के हर परिवहन के जीएसटी की निगाह में आने की चिंता थी,जबकि शुक्रवार को निश्चिंत थे कि अब कितनी भी रकम का माल किसी भी तरीके से देश के किसी हिस्से में भेजने के लिए किसी परिवहन प्रपत्र की जरूरत नहीं है।

उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष एक जुलाई से जीएसटी लागू हुआ था। जनवरी 2018 की शुरुआत में सीजीएसटी अफसरों की नजर में 46 ऐसी कंपनियां आईं जिनका आइटीसी क्लेम गलत लग रहा था। अधिकारियों की टीम लगाकर इन कंपनियों के कागजात और 89.61 करोड़ रुपये की आइटीसी जांची गई। मांगने पर 33 कंपनियों ने ही कागजात दिए। इनकी जांच पूरी हो गई है। इनकी 46.16 करोड़ की आइटीसी सही मिली लेकिन, इन्होंने 13 करोड़ की आइटीसी गलत तरीके से ली है। इन कंपनियों ने गड़बड़ी स्वीकार की है। इनके अब तक 52 लाख रुपये जमा हो चुके हैं। बाकी के लिए चालान तैयार हो रहे हैं। 13 कंपनियों पर आइटीसी की वैल्यू 33 करोड़ रुपये बन रही है। इन्हें सीजीएसटी ने संदेहास्पद सूची में डाल कर नोटिस जारी कर दिया है।

तीन स्तर पर कागजात चेक हुए। जीएसटी लागू होने के पहले के छह माह के रिटर्न। चाहे वे वैट, सर्विस टैक्स, एक्साइज किसी में भी क्यों न हों। ये रिटर्न जरूरी थे। बिना रिटर्न आइटीसी क्लेम नहीं की जा सकती थी। रिटर्न ठीक तरीके से फाइल किए या नहीं, इसकी भी जांच हुई। जिन इनवाइस के आधार पर आइटीसी क्लेम की गई, वे मान्य हैं या नहीं, यह भी देखा गया। बैलेंसशीट चेक की गई कि इनवाइस और बैलेंसशीट के आंकड़ों में कहीं अंतर तो नहीं है।

इन कंपनियों ने सेस की भी आइटीसी ले ली थी जबकि नियमानुसार ऐसा नहीं किया जा सकता। झांसी की एक कंपनी में गड़बड़ी पकड़ी गई। उसका आफिस हैदराबाद में भी है। अफसरों ने हैदराबाद सीजीएसटी कार्यालय को पत्र लिख वहां की कंपनी पर कार्रवाई की बात कही है। कंपनियां प्लास्टिक, स्टील, सर्विस प्रोवाइडर, केमिकल, प्रोसेसिंग यूनिट आदि इन उत्पादों की है। नोडल अधिकारी सीजीएसटी चंचल तिवारी ने बताया जिन 13 कंपनियों ने कागजात नहीं दिखाए हैं, उन्हें एक और मौका दिया गया है। तय समय में कागजात न दिखाए तो आइटीसी निरस्त कर वसूली होगी।

जीएसटी के ई-वे बिल का पोर्टल बैठते ही प्रदेश में अभूतपूर्व स्थिति आ गई है। जीएसटी लागू होने से पहले भी वैट में माल को इधर से भेजने के लिए फॉर्म-38 जरूरी होता था। जीएसटी लागू होने के बाद जब कई राज्य एक फरïवरी से नेशनल ई-वे बिल लागू होने का इंतजार कर रहे थे, तब यहां प्रदेश में वाणिज्य कर विभाग ने अपने ई-वे बिल की व्यवस्था शुरू कर दी थी। एक जुलाई, 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद 15 अगस्त तक डेढ़ महीने के लिए ही प्रदेश में इसकी छूट थी लेकिन जीएसटी की नई व्यवस्था में यह सामान्य बात थी। 16 अगस्त से प्रदेश ने ई-वे बिल की अपनी ऑनलाइन व्यवस्था कर दी थी लेकिन व्यापारियों के लिए यह अपरिचित थी। इसी वजह से कुछ जगहों पर कारोबारियों ने ई-वे बिल को नजरअंदाज किया तो कुछ जगहों पर उनसे इसे बनाने में चूक भी हुई लेकिन, वाणिज्य कर अधिकारियों ने दोनों तरह के मामलों में जमकर कार्रवाई की और खूब जुर्माना वसूला। प्रदेश के ई-वे बिल के साथ व्यापारियों का यह अनुभव ही नेशनल ई-वे बिल के उनके विरोध का कारण बन गया। देश भर में लागू व्यवस्था से वह दूर नहीं रह सकते थे इसलिए उन्होंने इसे स्वीकार करने का मन बनाया लेकिन ऐन

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