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1 जनवरी से रेल यात्रियों को मिलेगा पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन का मजा, होंगी ये खास सुविधाएं

नए साल से रेल यात्री सेमी हाई स्पीड ट्रेन सेट-18 (टी-18) में सफर का लुफ्त उठा सकेंगे। बिना इंजन वाली देश की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन-18 सफर में 160-200 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर दौड़ेगी। ट्रेन सेट 18 भोपाल शताब्दी के स्थान पर दिल्ली-भोपाल के बीच चलाई जाएगी।

विश्व स्तरीय सुविधाओं से लैस इस ट्रेन में सफर के लिए रेल यात्रियों को अधिक किराया देना होगा। रेल मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि टी-18 का किराया शताब्दी एक्सप्रेस से 45 फीसदी अधिक हो सकता है। हालांकि देश की पहली सेमी हाई स्पीड होने के नाते शुरुआत के छह माह किराया बेस फेयर से 1.20 से 1.30 गुना अधिक किराया रखा जाएगा। बाद में इसका किराया बढ़ाया जा सकता है। रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इंट्रीगल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), चेन्नई में ट्रेन सेट 18 लगभग बनकर तैयार है। यह सितंबर के अंत तक फैक्ट्री से बाहर आ जाएगी। इसके पश्चात ट्रेन सेट का ट्रायल दिल्ली-भोपाल रेल मार्ग पर किया जाएगा। क्योंकि यह सेक्शन 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार के लिए सही है। ट्रायल सफल होने के बाद दिसंबर के अंत अथवा जनवरी 2019 में इसका कॉमर्शियल ऑपरेशन शुरू होगा। अधिकारी ने बताया कि पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन सेट को दिल्ली-भोपाल शताब्दी को हटाकर चलाया जाएगा। नया रैक (ट्रेन) होने के कारण शुरुआत में दिल्ली-आगरा के बीच इसकी रफ्तार 150 किलोमीटर प्रतिघंटा रहेगी। आगरा से भोपाल तक ट्रेन सेट की रफ्तार शताब्दी की तर्ज पर

मेट्रो की तरह ऑटोमैटिक दरवाजे

ट्रेन सेट-18 रफ्तार के साथ यात्री संरक्षा व सुविधा के मामले में विश्व स्तरीय होगी। यूरोपियन तकनीक वाली इस ट्रेन सेट के दरवाजे प्लेटफार्म पर रुकने के बाद ही ऑटोमैटिक खुलेंगे। कोच की सीढ़ियां (स्लाइडिंग स्टेप) आगे आकर प्लेटफार्म से सट जाएंगी। जिससे प्लेटफार्म व कोच के बीच का गैप पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा और यात्रियों के टे्रन-प्लेटफार्म के बीच फंसने का खतरा नहीं होगा।

घुमावदार होंगी सीटें

ट्रेन सेट 18 शताब्दी एक्सप्रेस की तरह चेयरकार होगी। इसकी सीटें घुमावदार होंगी इससे जिस दिशा में ट्रेन चलेगी उसी दिशा में सीटें सेट की जा सकेंगी। कोच के भीतर प्लेन की तर्ज पर लंबी एलईडी लाइट ट्यूब लगी होंगी। ट्रेन सेट के कोच स्टेनलेस स्टील व यूरोपियन मानक के बनाए जा रहे हैं। ट्रेन के आंतरिक व बाहरी डिजाइन यूरोपियन कंसल्टेंट ने तैयार किया है। हर कोच में दिव्यागों के लिए एक व्हीलचेयर रखी जाएगी। दो कोच के बीच गैप नहीं होने से व्हीलचेयर को चलाने में दिक्क्त नहीं होगी।

घुमावदार होंगी सीटें

हाई स्पीड वाईफाई से मोबाइल, लैपटॉप, आईपॉड में रेलवे एप डाउनलोड कर सकेंगे। एप में देशी-विदेशी फिल्में, गाने, धारावाहिक व मनोरंजन के अलावा रेलवे जानकारी, टिकट बुकिंग, टैक्सी बुकिंग, होटल बुकिंग आदि की सुविधा होगी। प्रत्येक कोच में अपना खुद का इंजन होगा और पृथक ब्रेकिंग सिस्टम होगा। इससे शताब्दी की अपेक्षा ट्रेन सेट को तेजी से रोका और चलाया जा सकेगा।




COMMENTS

Suraj misra

Good work

Ravi

Nice