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ये हैं भारत के टॉप एनकाउंटर स्‍पेशलिस्‍ट, जिनसे आज भी थर्राते हैं अपराधी

नई दिल्‍ली [स्‍पेशल डेस्‍क]।दिल्‍ली के छतरपुर इलाके में शनिवार को हुई मुठभेड़ में जिन शातिर अपराधियों को ढ़ेर करने में पुलिस सफल हुई उनमें से एक पर लाख रुपये का इनाम था। इसका नाम राजेश भारती बताया गया है। इसके चार दूसरे साथी भी इस मुठभेड़ में मारे गए हैं। राजधानी में हुई इस मुठभेड़ ने एक बार दिल्‍लीवालों के दिलों में दहशत को जन्‍म दिया है। यह दहशत किसी और से नहीं बल्कि अपराधियों से है। हम जहां इनसे छिपकर बच निलकने की कोशिश में रहते हैं वहीं पुलिस के कुछ जांबाज इनका रास्‍ता रोकने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। देश में ऐसे एक नहीं कई पुलिसवाले मौजूद हैं, जिनके नाम से ही आज भी अपराध की दुनिया में खौफ पैदा हो जाता है। इनमें से कुछ का नाम आपने भी जरूर सुना होगा। आपको जानकर ताज्‍जुब होगा कि इनमें से कुछ पर तो अब तक छप्‍पन जैसी फिल्‍म भी बन चुकी है। इस फिल्‍म में मुख्‍य किरदार नाना पाटेकर ने निभाया था। लेकिन यह फिल्‍मी परदा था। आज हम आपको ऐसे ही कुछ पुलिसकर्मियों के बारे में बता रहे हैं जिन्‍हें एनकाउंटर स्‍पेशलिस्‍ट के तौर पर जाना जाता है।

प्रदीप शर्मा

मुंबई पुलिस में एक जांबाज अधिकारी में गिने जाने वाले प्रदीप शर्मा इंडिया के टॉप एनकाउंटर स्‍पेशलिस्‍ट हैं। इनकी गो‍ली से अब तक 104 शातिर अपराधियों को ढेर किये जा चुका हैं। इतना ही नहीं करीब 312 अपराधियों को ढेर करने के दौरान इनकी भूमिका अहम रही है। इनमें से ज्‍यादातर अपराधी मुंबई के अंडरवर्ल्‍ड से जुड़े थे। प्रदीप को सबसे निडर एनकाउंटर स्‍पेशलिस्‍ट माना जाता है।

प्रफुल भोंसले

मुंबई क्राइम ब्रांच में जांबाज अधिकारी के तौर पर शामिल प्रफुल भोंसले 1987 से पुलिस में हैं। वह अपनी जांच और अपराधियों के लिए एनकाउंटर स्‍पेशलिस्‍ट के तौर पर जाने जाते हैं। अपराधियों के गढ़ में इनकी दहशत रहती है। एक जेंटलमेन ऑफिसर माने जाने वाले प्रफुल अब तक 85 शातिर अपराधियों को ढेर कर चुके हैं। वह बेहद म्रदुल भाषी हैं लेकिन अपराधियों से बातें उगलवाने में बेहद कठोर माने जाते हैं। अविश्वसनीय जांच कौशल से धन्य, भोंसेले मुंबई पुलिस के कुख्यात (अपराधियों के बीच) 'डेथ स्क्वाड' का सबसे प्रसिद्ध सदस्य था। जबकि उनकी आधिकारिक हत्या की गिनती हमेशा एक रहस्य रही है, ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने अपने करियर की चोटी पर 90 अपराधियों को गोली मार दी है। छोटा शकील के लिए बंदूक किराए पर लेने वाले अरिफ कलिया उनका सबसे प्रसिद्ध मुठभेड़ थी।

दया नायक

दया नायक ने 1995 में मुंबई पुलिस ज्‍वाइन की थी। इस दशक के अंत तक वह एनकाउंटर स्‍पेशलिस्‍ट के तौर पर अपनी जगह बना चुके थे। वह अब तक 80 अपराधियों को मौत की नींद सुला चुके हैं। मुंबई की डिटेक्‍शन यूनिट का हिस्‍सा रहे दया नायक को 2006 में आय से अधिक की संपत्ति अर्जित करने और घूस लेने के आरोपों के बाद सस्‍पेंड कर दिया गया था। लेकिन सीबीआई को उनके खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिला था। इसके बाद 2012 में उन्‍हें दोबारा पुलिस में शामिल करते हुए उनका ट्रांसफर 2014 में नागपुर कर दिया गया था। लेकिन वहां ज्‍वाइन न करने के चलते उन्‍हें फिर कुछ समय के लिए सस्‍पेंड कर दिया गया था। बाद में ट्रांसफर ऑर्डर को रद करते हुए उन्‍होंने दोबारा पोस्टिंग दे दी गई थी। दया महाराष्‍ट्र पुलिस में एक निडर अधिकारी के तौर पर गिने जाते हैं।

दया नायक

विजय सालस्कर मुंबई पुलिस में सेवारत एक वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट थे। इन्हें अलग अलग मुठभेड़ों में 83 अपराधियों को मार गिराने का श्रेय दिया जाता है, जिसमें से अधिकांश अरुण गवली गिरोह के सदस्य थे। कभी गवली गैंग की मुंबई में जबरदस्‍त दहशत थी। सालस्कर नवंबर 2008 के मुंबई हमलों में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए थे। 2009 में अशोक चक्र से सम्‍मानित किया गया था।