Yo Diary

UPSC 2017: परचम लहरा रहे हैं पूर्वोत्तर के छात्र

'मणिपुर में सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की है. यहां आतंकवाद और विद्रोह की समस्या बेरोजगारी के कारण है

देहरादून के वेल्हम गर्ल्स बोर्डिंग स्कूल से 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद पूजा ने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास में डिग्री हासिल की. अपने पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल करने वाली पूजा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से इंटरनेशनल रिलेशन में एमए कर चुकी हैं.

कोई कोचिंग नहीं ली

यूपीएससी की परीक्षा में अपनी सफलता पर बीबीसी से बातचीत में पूजा कहती हैं, "मुझे स्कूल के दिनों से किताबें पढ़ने का शौक रहा है. मैंने स्कूल और कॉलेज की किताबों के अलावा दूसरे विषयों से जुड़ी काफी किताबें पढ़ी हैं." "लिहाजा मैंने इस परीक्षा की तैयारी के लिए कहीं कोचिंग नहीं ली. घर पर एक साल पढ़ाई की. मेरे पापा ने मेरी बहुत मदद की. वे मणिपुर कैडर के आईपीएस हैं तो उन्होंने क्या पढ़ें, क्या नहीं, ये चुनने में मेरी मदद की. इसके अलावा मेरी मां एक शिक्षिका है, उनसे भी मुझे काफी मदद मिली.'' सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू के दौरान मणिपुर में अलगाववादी संगठनों की समस्या से जुड़े सवाल भी पूजा से पूछे गए थे. वो बताती हैं, "दरअसल मैं मणिपुर की परंपरागत हाथ से बनी साड़ी पहनकर इंटरव्यू देने पहुंची थी. जो लोग इंटरव्यू ले रहे थे उन सभी ने मेरे साथ बहुत अच्छी तरह बात की."

"शायद मेरी साड़ी पर उनका ध्यान गया और उन्होंने मुझसे मणिपुर और पूर्वोत्तर राज्यों के बारे में कई सवाल पूछे. मुझसे अरुणाचल प्रदेश की जनजातियों के बारे सवाल किए गए."

पूजा आगे बताती हैं, "इसके अलावा मणिपुर में अलगाववादी संगठनों से जुड़ी समस्याओं के बारे में पूछा और इसके समाधान के लिए मेरी राय मांगी. तब भी मैंने कहा था कि बेरोजगारी के कारण ही मणिपुर में आतंकवाद की समस्या हैं." वो कहती हैं, "इंटरव्यू के समय भी मैंने कहा था कि मणिपुर में चरमपंथियों की समस्या के समाधान के लिए युवाओं को रोजगार मिलना ज़रूरी हैं. जबकि सरकारी नौकरी तो केवल एक फ़ीसदी लोगों को ही मिलती है. इसलिए उद्यम के साथ युवाओं का कौशल विकास होना चाहिए. मणिपुर में छोटे उद्योगों को बढ़ाने की आवश्कता है."