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हिंदू नववर्ष के साथ आठ दिवसीय चैत्र नवरात्रि आज से, देवी मंदिरों में भीड़

नई दिल्ली/इंदौर, (जेएनएन)।चैत्र नवरात्रि 2018 आज से यानि 18 मार्च से शुरू हो गया है। यह हिंदुओं का सबसे पवित्र त्योहार माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाली इस पूजा में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। हिन्दू परंपरा के अनुसार इन 9 दिनों का विशेष महत्व होता है। खास बात यह है कि इस बार नवरात्रि 8 दिन का ही होगा। नवरात्रि का त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को नवरात्रि की बधाई दी है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि नव संवत्सर और नवरात्रि की सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। विक्रम संवत 2075 सबके जीवन में सुख, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य लेकर लाए।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी ट्विटर पर देशवासियों को नवरात्रों और हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं दी हैं। रामनाथ कोविंद अपनी पत्नी सविता और धर्मेंद्र प्रधान के साथ ओडिसा में पुरी के जगन्नाथ मंदिर गए।

हिंदू नववषर्ष विक्रम संवत 2075 'विरोधकृत' और आठ दिनी नवरात्रि की शुरआत 18 मार्च को गुड़ी पड़वा से होगी। सुबह 6.34 पर उगते सूर्य को अ‌र्घ्य देकर नववषर्ष की अगवानी और माता मंदिरों के साथ घरों में घट स्थापना होगी। इस बार अष्टमी और नवमी एक दिन (25 मार्च को) होने से चैत्र नवरात्रि आठ दिन की होगी।

माता के मंदिर फूलों और रोशनी से जगमगा रहे हैं। नवरात्रों को लेकर श्रद्धालुओं में उल्लास है। सुबह होती ही मंदिरों पर भीड़ जुटनी शुरू हो गई है। दिल्ली के कालका मंदिर में नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धालु सुबह से ही लंबी लंबी लाइनों में दिखाई दिए। मुंबई के देवी मंदिर में लोगों की भीड़ जुटी।

नौ दिनों तक चलने वाली इस पूजा में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। हिन्दू परंपरा के अनुसार इन 9 दिनों का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के पहले दिन माता के नौ रूपों में से मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन मां के जिस रूप की उपासना की जाती है, उसे शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण मां दुर्गा के इस रूप का नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा था। शास्त्रों के अनुसार माता शैलपुत्री का स्वरुप अति दिव्य है। मां के दाहिने हाथ में भगवान शिव द्वारा दिया गया त्रिशूल है जबकि मां के बाएं हाथ में भगवान विष्णु द्वारा प्रदत्त कमल का फूल सुशोभित है। मां शैलपुत्री बैल पर सवारी करती हैं और इन्हें समस्त वन्य जीव-जंतुओं का रक्षक माना जाता है। ये है घट स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त घट स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त -ब्रह्मकाल और शुभ: सुबह 5.35 से 6.26 बजे तक। अभिजित और अमृत: दोपहर 12.08 से 12.32 बजे तक। चौघ़ि़डया अनुसार मुहूर्त चर : सुबह 8.03 से 9.33 बजे तक। लाभ : सुबह 9.34 से 11.02 बजे तक। अमृत : सुबह 11.03 से दोपहर 12.32 बजे तक। शुभ :