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जहरीले तंबाकू से वैज्ञानिक बना रहे आर्टिफिशियल लंग्‍स, जिंदगी बचाने का करेगा काम

लंदन [ एजेंसी ]।अब जानलेवा तंबाकू मानव जीवन के लिए वरदान साबित होगी। हर साल धूम्रपान से संबंधित बीमारियों के चलते लाखों लोग मौत के शिकार हो जाते हैं। इसके बढ़ते चलन और सेवन से पूरी दुनिया चिंतित है। लेकिन अब यह जहरीली तंबाकू लाखों लोगों के लिए संजीवनी का काम करेगी। यानी जीवन को बचाने के लिए तंबाकू का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सूचना आपको अचरज में डाल देगी, पर यह सौ फीसद सच है। वैज्ञानिक अब तंबाकू से कृत्रिम फेफड़े बना रहे हैं।

दरअसल, वैज्ञानिक मानव प्रत्यारोपण के लिए कृत्रिम फेफड़ों काे विकसित कर रहे हैं। इन कृत्रिम फेफड़ाें को पूरी तरह से तंबाकू से निर्मित किया जाएगा। इसमें तंबाकू के अवयवों को नए तरीके से विकसित किया जा रहा है। दरअसल, इसके लिए वैज्ञानिक तंबाकू के अंदर कोलेजन नामक तत्‍व को सिंथेटिक रूप में संशोधित करेंगे। यह एक रेशेदार पदार्थ है, जो शरीर के विभिन्‍न अंगाें के लिए एक मचान का कार्य करता है। दरअसल, कोलेजन के प्रोटीन मजबूत स्ट्रैंड बनाने के लिए अणुओं को कसकर एक साथ पैक करते हैं, जो कोशिकाओं के विकास के लिए एक समर्थन संरचना के रूप में कार्य करते हैं।

इस बाबत शोधकर्ता तंबाकू के पौधों को आनुवांशिकी रूप से संशोधित करने में जुटे हैं, जिससे वह प्रचुर मात्रा में कोलेजन की उत्‍पत्ति करेगा। यह मानव शरीर के लिए भी उपयोगी होगा। शोध में यह पाया गया कि कोलेजन के कारण केवल आठ सप्‍ताह में एक पौधा परिपक्‍व हो जाता है। इससे वैज्ञानिकों का यह दावा मजबूत हो जाता है कि तंबाकू में पाये जाने वाले कोलेजन से बड़े पैमाने पर कृत्रिम फेफड़ों का उत्पादन किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने तंबाकू के पौधों को आनुवांशिक रूप से कोलेजन को संशोधित करने का एक तरीका पाया है। यह मानव शरीर की तुलना में बड़ी मात्रा में कोलेजन उत्पन्न कर सकता है। तंबाकू कोलेजन बढ़ने के लिए आदर्श वाहक है, क्योंकि ये पौधे जल्दी परिपक्व हो जाता है। इसलिए कृत्रिम फेफड़ों को बनाने के लिए इसकी लगातार आपूर्ति होती रहती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है। लेकिन उन्‍होंने उम्‍मीद जताई है कि इस तकनीक से कृत्रिम फेफड़ों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सकता है। इसलिए प्रत्यारोपण के लिए अब मरीजों को वर्षों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जैसा कि अभी तक उपयुक्त दाता अंग प्राप्त करने के लिए होता है। एनएचएस रक्त और प्रत्यारोपण के हालिया आंकड़ों से पता चला है कि ब्रिटेन में फेफड़ों के प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में पिछले पांच वर्षों में 46 फीसद की वृद्ध‍ि हुई है। फेफड़ों के प्रत्यारोपण के इंतजार में कई मरीजों की मौत हो जाती है। एक प्रत्‍यारोपण से पहले चार मरीजों की मौत हो जाती है। ऐसे में कृत्रिम फेफड़े से बेहतर विक्‍लप की उम्‍मीद जगी है।

इज़राइली बायोटेक फर्म कोल्पप्लेंट के वैज्ञानिकों ने केवल आठ सप्ताह में तंबाकू संयंत्रों में कोलेजन बढ़ने की विधि को पूरा किया है। इसके बाद जब ये पौधे परिपक्व हो जाते हैं, तो पत्तियों को कटाई और 'बायोइन्क' बनाने के लिए संसाधित किया जाता है। अब तक इस फर्म ने फेफड़ों के ऊतक के केवल एक छोटे से हिस्से का उत्पादन किया है। इन ऊतकों की लंबाई दो इंच है। शोधकर्ताओं ने अभी तक इसे मानव फेफड़ों के कामकाज के लिए विकसित नहीं किया है, जो स्टेम कोशिकाओं के साथ कोटिंग करते हैं जो प्रत्यारोपण के लिए स्वस्थ ऊतक तैयार करते हैं। इस साल की शुरुआत में, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने डिटर्जेंट का उपयोग करके कोशिकाओं को एक सुअर फेफड़ों में प्रयोग किया। वैज्ञानिकों का यह प्रयोग सफल रहा।

हालांकि, ब्रिटेन स्टेम सेल फाउंडेशन के मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी प्रोफेसर ब्रेंडन नोबल का कहना है कि तंबाकू से उगाए गए फेफड़ों में प्रत्यारोपण सर्जरी को बदलने की क्षमता है, लेकिन अभी इसकी सुलभता में दस वर्ष का समय लगेगा। उन्‍होंने कहा कि अभी इसके लिए एक लंबा रास्‍ता तय करना है। इसकी चुनौतियां बड़ी हैं। उन्‍होंने साफ किया कि यह स्पष्ट नहीं है कि मचान में कोशिकाओं का यह अपेक्षाकृत सरल दृष्टिकोण फेफड़ों जैसे जटिल और बड़े ढांचे के निर्माण के लिए उपयोग किया जा सकता है।