Yo Diary

झारखंड सरकार, टिस व चैतन्या के सहयोग से ई-लर्निंग कोर्स शुरू, शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास

रांची :ग्रामीण विकास विभाग से संबद्ध झारखंड राज्य ग्रामीण आजीविका प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) ने पुणे की गैर सरकारी संस्था चैतन्या तथा टाटा इंस्टीट्यूट अॉफ सोशल साइंसेस (टिस), मुंबई के सहयोग से एक शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है.

स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) तथा संघ (फेडरेशन) प्रबंधन से जुड़े इस ई-लर्निंग कोर्स की लांचिंग बुधवार को प्रोजेक्ट भवन सभागार में हुई. दसवीं पास कोई भी युवा, प्रौढ़ या बुजुर्ग यह कोर्स कर सकते हैं. कुल छह माह के इस कोर्स में 15 दिन कक्षाएं होंगी, जिसमें प्रतिभागियों के लिए चैतन्य व टिस के विशेषज्ञों का व्याख्यान होगा. शेष पूरा फील्ड का प्रैक्टिकल कोर्स होगा. मौके पर जेएसएलपीएस के सीइअो पारितोष उपाध्याय ने कहा कि इस कोर्स की डिजाइन ऐसी की गयी है कि प्रतिभागी अपना कार्य करते हुए अपनी शैक्षणिक योग्यता बढ़ा सकते हैं.

छह माह के कोर्स व मूल्यांकन के बाद प्रतिभागियों को टिस का प्रमाण पत्र मिलेगा, जो अपने आप में बहुमूल्य होगा. श्री उपाध्याय ने कहा कि हम फील्ड कर्मियों की योग्यता बढ़ाने वाले कई अौर कोर्स शुरू करेंगे. संस्था चैतन्या की प्रबंध निदेशक कल्पना पंत ने कहा कि ग्रामीण भारत के लिए हिंदी में शुरू होने वाला यह कोर्स अपने कंटेंट के मामले में देश का पहला कोर्स है. इसे टिस, चैतन्या व जेएसएलपीएस ने अपने अनुभवों से साझा रूप से तैयार किया है. नाबार्ड ने भी इसे अनुमोदित किया है. टिस की प्रोफेसर लता दास ने कहा कि पारंपरिक शिक्षण संस्थाअों, कॉलेज या यूनिवर्सिटी से बाहर लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की यह नयी पहल है. कार्यक्रम के दौरान कोर्स से संबंधित चार पेज के बुकलेट तथा कोर्स कंटेंट की विवरणी का भी विमोचन किया गया. कार्यक्रम का संचालन मीनाक्षी प्रकाश ने किया. इस अवसर पर जेएसएलपीएस से जुड़े पदाधिकारी तथा कोर्स करने वाले पहले बैच के विद्यार्थी उपस्थित थे.

पाठ्यक्रम विशेषता :कंप्यूटरीकृत ज्ञान, डिजिटल साक्षरता, शिक्षण कार्यप्रणाली, अतिथि लेक्चर, क्षमता वर्द्धन, क्षेत्रीय प्रशिक्षण, कोर्स सरल हिंदी भाषा में तथा विषय वस्तु से संबंधित शंका का निवारण सत्र. कैसे करें अावेदन : प्रतिभागी वेबसाइट www.shglearning.com पर निबंधन करा सकते हैं. निबंधन के बाद पढ़ाई के लिए टैबलेट दिया जायेगा. कुल 10 हजार शिक्षण शुल्क वाले इस कोर्स के लिए भुगतान दो किस्तों में कर सकते हैं.

एसएचजी व फेडरेशन मैनेजमेंट संबंधी इस ई-लर्निंग कोर्स के आठ मॉड्यूल हैं. इनमें गरीबी, लिंग (जेंडर) व विकास, गरीबों के संगठनों का संस्थागत विकास, स्वयं सहायता समूहों की वित्तीय प्रणाली, ग्राम संगठन के निर्माण की प्रक्रिया व कार्यप्रणाली, स्वयं सहायता समूहों के महासंघ का निर्माण, मानव संसाधन प्रबंधन व विकास, नेतृत्व क्षमता व संगठित नेतृत्व का विकास तथा स्थायी संस्थागत निर्माण शामिल है.