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झारखंड : असंवैधानिक होगा ग्राम विकास समिति का गठन

रांची : झारखंड मुखिया संघ, झारखंड के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को राज्यपाल से मुलाकात कर उनसे ग्राम विकास समिति व आदिवासी विकास समिति के गठन संबंधी सरकारी संकल्प को निरस्त करने की मांग की है.

संघ के प्रदेश संयोजक विकास कुमार महतो के नेतृत्व में राज्यपाल को सौंपे गये ज्ञापन में कहा गया है कि ग्रामीण विकास विभाग (पंचायती राज्य) ने 13 मार्च को एक संकल्प जारी कर इन समितियों के गठन की बात कही है. ज्ञापन में संघ ने लिखा है कि संविधान के 73वें संशोधन का मुख्य लक्ष्य ग्राम स्तर पर स्थानीय स्वशासन (लोकल गवर्नेंस) स्थापित करना है, जिसमें जनता की प्रत्यक्ष भागीदारी ग्राम सभा के माध्यम से हो सके. झारखंड पंचायती राज अधिनियम की धारा 10 में ग्राम सभा की शक्ति व कृत्य का वर्णन है. इस आलोक में आदिवासी विकास/ ग्राम विकास समिति का गठन पूरी तरह गैर संवैधानिक है. वर्तमान में योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए ग्राम सभा द्वारा लाभुक समिति के गठन का नियम लागू है, जिससे हर गांव के लोगों को इस प्रक्रिया में शामिल होने का मौका मिलता है.

अतः इसे बदलने का कोई औचित्य नहीं है. संघ ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि संविधान के 73वें संशोधन के तहत सामान्य तथा पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में ग्राम सभा के अधिकार तथा स्थानीय स्वशासन की मूल भावना को अक्षुण्ण रखते हुए संबंधित संकल्प तत्काल निरस्त किया जाये. प्रतिनिधिमंडल में मुखिया अजय कुमार सिंह, गौरी शंकर महतो, मनोज कुमार हांड़ी, रितेश उरांव, सुदीप गुड़िया व गंगाधर महतो शामिल थे.