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शहीद की बहन ने कहा- भाई के रहते पिता की कभी कमी महसूस नहीं हुई

मांडर/रांची :बड़े भाई रंजीत खलखो की शहादत पर उनके छोटे भाई और बहनों को गर्व है. बड़ी बहन रजनी खलखो के आंसू थम नहीं रहे थे. उसका कहना था कि कुछ दिन पहले उसकी रंजीत से बात हुई थी. वह सभी भाई-बहनों का बहुत ख्याल रखता था. 2012 में पिता की मृत्यु के बाद पूरे घर की जिम्मेदारी उसके ही कंधों पर थी. उसने कभी भी उन्हें महसूस नहीं होने दिया कि उनके बीच उनके पिता नहीं हैं.

वहीं छोटे भाई राजेंद्र खलखो ने कहा कि उसे अपने बड़े भाई की शहादत पर गर्व है. उसके भाई ने आतंकवादियों से लड़ते हुए देश के लिए अपनी शहादत दी है. जिस पर उसे ही नहीं पूरे परिवार को फख्र है. राजेंद्र का कहना था कि उसकी इच्छा भी सेना में जाने की थी, लेकिन 2012 में पिता की आकस्मिक मौत के बाद उसकी यह इच्छा अधूरी रह गयी. उसने बताया कि रंजीत पिछली बार 28 दिसंबर को घर आया था. और परिवार के लोगों के साथ ही नया साल मनाने के बाद पांच जनवरी को वापस कश्मीर गया था. ड्यूटी पर जाने से पूर्व उसने एक नयी स्विफ्ट कार भी खरीदी थी और कह कर गया था अगली छुट्टी में 15 अप्रैल के बाद जब वह घर आयेगा, तो अपनी शादी का कार्य निबटा कर ही जायेगा.

बुधवार को दोस्त इरशाद ने रंजीत से की थी बात : रंजीत के एक करीबी दोस्त इरशाद अंसारी के मुताबिक उसने बुधवार को अपराह्न करीब दो बजे रंजीत खलखो से बात की थी. तब उसने सबका हाल चाल लिया था. इसके बाद उसे शाम में पता चला कि आतंकवादियों से लोहा लेते हुए वह शहीद हो गये हैं. बुढ़ा खुखरा के मुकेश खलखो ने कहा कि रंजीत खलखो काफी मिलनसार था. वह जब भी छुट्टी में घर आता था, तो लोगों से मिलता था और उनका हाल चाल लेता था. लोगों की दुख-सुख में मदद भी करता था.