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झारखंड : शौचालय बनाने के लिए निकलीं महिलाएं, बन गया 'रानी मिस्त्री' आंदोलन

सिमडेगा :शौचालय निर्माण को लेकर सिमडेगा की चर्चा सिर्फ झारखंड में नहीं, बल्कि पूरे देश में हो रही है. क्योंकि यहां शौचालय निर्माण का बीड़ा खुद महिलाओं ने उठाया है. महिलाएं समूह बनाकर खुद शौचालय बना रही है, जिन्हें रानी मिस्त्री का नाम दिया गया है.

रानी मिस्त्री अभियान

सामान पहुंचाओ शौचालय बनाओ' अभियान की शुरुआत सिमडेगा से हुई थी. महिला मंडल ने इस काम को पूरा करने का संकल्प लिया था. इस अभियान की सफलता से उत्साहित सरकार ने अब इसे पूरे झारखंड में लागू कर दिया है. सरकार का मकसद है कि इसके जरिए महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जाए. सिमडेगा में अब एक और अभियान की शुरुआत हुई है जिसका नाम है 'रानी मिस्त्री लाओ, शौचालय बनवाओ'.

महिलाएं बनीं राज मिस्त्री

इससे पहले सिमडेगा में 'गड्ढा खोदो' अभियान भी चलाया गया था, जिसके तहत 65 हजार घरों में 7 दिन के अंदर शौचालय के लिए गड्ढे खोदे गए थे. लेकिन जब इस काम के लिए राज मिस्त्री की संख्या कम पड़ रही थी, तब महिलाओं ने खुद शौचालय बनाने का मोर्चा संभाला. खासबात ये है कि महिलाएं राज मिस्त्री का काम करने के लिए आगे आईं और उन्होंने इस अभियान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया.

सिमडेगा के उपायुक्त जटाशंकर चौधरी ने बताया कि सिमडेगा में इस अभियान की शुरूआत हुई और अब लोग महिला मिस्त्री को रानी मिस्त्री के रूप में जानने लगे हैं. महिला मिस्त्री को दिया गया सम्मान अब लोगों के दिलों में बैठ गया है. महिलाओं ने शौचालय निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाया है. उन्होंने बताया कि ठेठाईटांगर ब्लॉक के कोरमिया गांव से रानी मिस्त्री लाओ, शौचालय बनवाओ अभियान की शुरुआत हुई था. महिला मंडल ने इस काम को पूरा करने का संकल्प लिया है. उन्होंने बताया कि शौचालय निर्माण में जुटी रानी मिस्त्रियों को सरकार ट्रेनिंग देगी और फिर उन्हें प्रधानमंत्री आवास निर्माण के काम से भी जोड़ा जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि महिलाओं की भागीदारी से स्वच्छ झारखंड का सपना जल्द साकार होगा.