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9 राज्यों की पुलिस कर रही थी इस बर्बर नक्सलवादी की तलाश, झारखंड में ऐसे हुई मौत

रांची : भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य और सबसे खूंखार नक्सली नेताओं में शुमार देव कुमार सिंह उर्फ अरविंद जी (53), जिसकी तलाश 9 राज्यों की पुलिस कर रही थी, झारखंड में मर गया. पुलिस को उसका शव नहीं मिला है, लेकिन बताया जाता है कि झारखंड में हिंसक नक्सली गतिविधियों को बढ़ावा देने वाला यह शीर्ष नक्सली नेता अब इस दुनिया में नहीं है.

झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित बूढ़ा पहाड़ पर इस नक्सली को घेरने के लिए करीब 2,000 सुरक्षा बल के जवान डेरा डाले हुए हैं. कई बार खबर आयी कि अरविंद जी को सुरक्षा बलों ने घेर लिया है. लेकिन, यह नक्सली नेता कभी जवानों के हत्थे नहीं चढ़ा. झारखंड पुलिस के प्रवक्ता ने कहा है कि शीर्ष नक्सली नेता अरविंद जी मर चुका है.

अरविंद जी की मौत की वजह दिल का दौरा पड़ना बताया जा रहा है. जिस बूढ़ा पहाड़ को उसने अपना ठिकाना बना रखा था, उसी बूढ़ा पहाड़ पर बुधवार को दिन में करीब 10 बजे अंतिम सांस ली. सरकार ने उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. बताया जाता है कि यह नक्सली नेता लंबे समय से बीमार चल रहा था और ऑक्सीजन पर था.

सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि घोड़े पर चलने वाले करीब 50 साल के अरविंदजी ऊर्फ देव कुमार सिंह ऊर्फ निशांत की छत्तीसगढ़ की सीमा से लगने वाले झारखंड के बूढ़ा पहाड़ के जंगलों में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गयी. झारखंड और बिहार में पुलिस बलों द्वारा ए श्रेणी में रखा गया यह नक्सली नेता प्रतिबंधित भाकपा( माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य था.एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा, ‘हमारे पास अरविंदजी की मौत की खबर है. माना जा रहा है कि आज उसे दिल का दौरा पड़ा, जिसमें उसकी जान चली गयी. उस वक्त वह बूढ़ा पहाड़ इलाके में था.’

सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने हालांकि स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं की. उन्होंने कहा कि अरविंदजी पढ़ा-लिखा और तकनीकी विशेषज्ञ था. वह मधुमेह समेत कई बीमारियों से ग्रस्त था. सुरक्षा बलों पर हुए कई हमलों के पीछे उसका शातिर दिमाग था. बताया जाता है कि इस चर्चित नक्सली कमांडर के नेतृत्व या दिशा-निर्देश में पुलिस बलों पर 50 से अधिक हमले किये गये.

झारखंड में पुलिस के लिए बन गया था चुनौती:-आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में भाकपा माओवादी संगठन के लिए काम कर चुके अरविंदजी को नौ राज्यों की पुलिस तलाश कर रही थी. वर्ष 2011 से वह झारखंड के लातेहार, गुमला, लोहरदगा और गढ़वा इलाके में सक्रिय था और पुलिस के लिए गंभीर चुनौती बन गया था. बाद में सुधाकरण और कुछ अन्य नक्सलियों के इस क्षेत्र में आने से अरविंदजी की ताकत कई गुना बढ़ गयी थी.