Yo Diary

रांची : रिम्स में जो जांच मुफ्त में हो जाती है उसके भी पैसे वसूल लेते हैं दलाल

रांची :राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में न्यूनतम दर पर कई तरह की पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच की जाती है. वहीं, गरीबों के लिए भी कई तरह की जांच मुफ्त है. इसके बावजूद अस्पताल में सक्रिय निजी जांच घरों के दलालों की फौज यहां आनेवाले मरीजों को झांसे में लेकर मोटा मुनाफा कमा रही है. ये दलाल मरीजों को कम समय में पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच करा देने का झांसा देकर सैंपल लेते हैं या मरीजों को निजी जांच घरों में ले जाते हैं. इससे रिम्स प्रबंधन को भी आर्थिक नुकसान हो रहा है. सोमवार को एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसका वीडियो फुटेज प्रभात खबर संवाददाता के हाथ लगा है.

बिहार से इलाज के लिए रिम्स पहुंची रधवा देवी (38 वर्ष) और उसके परिजन सोमवार को रिम्स में सक्रिय दलाल के चंगुल में फंस गये. रिम्स के सामने चलनेवाले एक छोटे निजी जांच घर के दलाल ने सीबीसी और थायराइड प्रोफाइल जांच के नाम पर इन लोगों से मनमाना पैसा ठग लिया. जबकि, रिम्स में इस तरह की जांच महज 300 से 400 रुपये में हो जाती है. वहीं, रिम्स में चल रही सरकार द्वारा अधिकृत निजी जांच एजेंसी मेडाल भी है, जहां सीजीएचएस दर पर जांच की जाती है. यहां भी निजी जांच घरों की तुलना में काफी कम दर पर जांच हो जाती है. ...गरीब हैं सर, 50 रुपये तो छोड़ दीजिए सैंपल लेने के बाद दलाल ने मरीज के परिजन से 800 रुपये मांगे. 500 रुपये के दाे नोट देते समय मरीज के परिजन ने दलाल से आग्रह किया, ‘हम गरीब लोग हैं सर, 50 रुपये तो छोड़ दीजिए.’ लेकिन, दलाल नहीं माना और परिजन से पूरा पैसा लेकर चला गया.

परिजनों को ऐसे फंसाया दलाल ने

निजी जांच घर के दलाल ने रिम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रवेश द्वार पर ही मरीज के परिजन को रोक लिया. उसने कहा कि रिम्स में जांच कराने पर समय लगता है. रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन का समय लगता है. हम आपको शाम तक जांच का रिपोर्ट दे देंगे. यह सुनकर मरीज के परिजन जांच कराने पर राजी हो गये. सैंपल व पैसा लेते समय दलाल ने अपना फोन नंबर भी दिया. कहा : रिपोर्ट की सूचना के लिए इस नंबर पर फोन कर लीजियेगा. रिम्स परिसर में निजी जांच घर के दलालों को पकड़ने पर पुलिस को दिया जाता है. आम आदमी की तरह वह परिसर में घूमते रहते हैं, इसलिए उन्हें पकड़ना भी कठिन होता है. इसके बावजूद मंगलवार को दिशा निर्देश दिया जायेगा. डॉ एसके चौधरी, अधीक्षक, रिम्स ट्रॉली पर जा रहा था सामान, गोद में मरीज रिम्स के कार्डियोलॉजी विंग में सोमवार काे मरीजों को ट्रॉली नसीब नहीं हुआ. मजबूरन परिजन अपने मरीज को गोद में उठा कर लाने को विवश थे. वहीं, ट्रॉली से सामान ढोया जा रहा था. कार्डियोलॉजी विंग में एक ऐसा ही दृश्य देखने को मिला. गिरिडीह निवासी कमला देवी को उसका बेटा गोद में उठाकर ओपीडी से बाहर निकाल रहा था. मर

रांची : इंजीनियरों की टीम मंगलवार को रिम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के खराब पड़े कैथलैब को दुरुस्त करने का प्रयास करेगी. इसके लिए कोलकाता से उपकरण मंगाये गये हैं. अगर इन उपकरणों से मशीन चालू हो गयी, तो ठीक, वरना जर्मनी से उपकरण मंगाने होंगे. वहां से उपकरण आने और उसे लगाने में कम से कम एक सप्ताह का समय लगेगा. गौरतलब है कि रिम्स के कार्डियोलॉजी विंग का कैथलैब चार दिन से खराब है. इस वजह से एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर लगाने का कार्य पूरी तरह ठप है. ओपीडी में आनेवाले मरीजों को कहा जा रहा है कि मशीन खराब है. ठीक होते ही सेवाएं शुरू हो जायेंगी. इधर, कार्डियोलॉजी आइसीयू में एंजियोग्राफी जांच के इंतजार में दो-तीन मरीज पहले से भर्ती हैं. वहीं, जिन मरीजाें को ओपीडी से सेवा शुरू करने के लिए कहा गया है, वह फोन कर डॉक्टर से पता कर रहे हैं.