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लालू प्रसाद यादव दुमका कोषागार से निकासी मामले में भी दोषी, डॉ जगन्नाथ मिश्र रिहा

रांची :बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लिए सप्ताह के पहले दिन सोमवार को रांची से बुरी खबर आयी. अविभाजित बिहार के सबसे बड़े घोटाला के चौथे मामले RC 38A/96 में भी लालू प्रसाद को सीबीआइ की विशेष अदालत ने दोषी करार दे दिया. हालांकि, इसी मामले के आरोपी बिहार के एक और पूर्व सीएम डॉ जगन्नाथ मिश्र समेत 12 आरोपियों को बरी कर दिया गया. कोर्ट ने लालू समेत 19 आरोपियों को दोषी करार दिया है. सभी दोषियों को 21, 22 और 23 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सजा सुनायी जायेगी. इन्हें 6 -6 के ग्रुप में सजा सुनायी जायेगी.

सीबीआइ के विशेष जज शिवपाल सिंह ने सोमवार को जैसे ही राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को सजा सुनायी, राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोल दिया. रघुवंश प्रसाद ने कहा कि फैसला पहले से ही लिखा जा चुका था. उन्होंने इस नरेंद्र मोदी का खेल बताया. कहा कि किसी को बेल और किसी को जेल, यही है नरेंद्र मोदी का खेल. हालांकि, इससे पहले रघुवंश बाबू ने उम्मीद जतायी थी कि जिस तरह से कोर्ट लोगों को बरी कर रहा है, लालू प्रसाद को भी इस मामले में निर्दोष करार दे दिया जायेगा. लेकिन, जब फैसला उनके विपरीत आया, तो रघुवंश बाबू ने मोदी सरकार पर हमला बोल दिया.

चारा घोटाला से जुड़ा यह चौथा मामला दुमका कोषागार से फर्जीवाड़ा के आधार पर 3 करोड़ 76 लाख रुपये की निकासी से जुड़ा है, जिसमें बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्र समेत 31 आरोपी थे. चारा घोटाला के तीन मामलों में सीबीआइ की विशेष अदालत लालू प्रसाद को साढ़े 13 साल की सजा सुना चुकी है. इसमें दो केस में 5-5 साल और एक अन्य केस में साढ़े तीन साल के लिए लालू को जेल की सजा सुनायी गयी है. इन मामलों में उन पर जुर्माना भी लगाया गया है.

दुमका कोषागार से जुड़े चारा घोटाला के इस मामले में बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत कई राजनेता, अधिकारी और ठेकेदार आरोपी बनाये गये थे. पिछले सप्ताह सीबीआइ की स्पेशल कोर्ट ने लालू प्रसाद की याचिका पर सुनवाई करते हुए संयुक्त बिहार के तत्कालीन महालेखाकार पीके मुखोपाध्याय, उप महालेखाकार बीएन झा और प्रमोद कुमार को चारा घोटाले में आरोपी बनाये जाने का आदेश दिया था. यहां बताना प्रासंगिक होगा कि दुमका कोषागार से 1995-96 के बीच 96 फर्जी वाउचर के जरिये 3.76 करोड़ रुपये की निकासी का आरोप है. यह निकासी जिले के गांवों और कस्बों में पशुओं की खाद्य सामग्री, दवा तथा कृषि उपकरणों के वितरण के नाम पर की गयी थी. उस दौरान धन आवंटन की अधिकतम सीमा मात्र 1.50 लाख रुपये थी.

चारा घोटाला मामले की सुनवाई 22 वर्ष तक चली. इस दौरान सीबीआइ ने 49 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर करीब 200 गवाहों को कोर्ट में पेश किया. 49 आरोपियों में तीन सरकारी गवाह बन गये. इनमें से एक की मौत हो चुकी है. एक आरोपी दुमका के तत्कालीन कमिश्नर एसएन दुबे पर लगे आरोप ऊपरी अदालत से निरस्त हो गये. दो दशक से अधिक चली सुनवाई के दौरान 14 आरोपियों की मौत हो गयी. लालू और जगन्नाथ के अलावा कई और राजनेता चारा घोटाला मामले में आरोपी हैं. इनके नाम पूर्व सांसद डॉ आरके राणा, पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद, तत्कालीन लोक लेखा समिति के अध्यक्ष ध्रुव भगत और जगदीश शर्मा हैं.

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि अविभाजित बिहार के पशुपालन विभाग में अरबों रुपये के चारा घोटाला का 90 के दशक में पर्दाफाश हुआ था. उस समय लालू प्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री थे. पटना हाइकोर्ट के आदेश पर इस अनूठे घोटाले की जांच सीबीआइ को सौंपी गयी थी. इस संबंध में केंद्रीय जांच एजेंसी ने कई मुकदमे दर्ज किये. यहां बताना प्रासंगिक होगा कि विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने सभी आरोपियों को 12 बजे तक कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया था. इसके बाद डॉ जगन्नाथ मिश्र, पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद, तत्कालीन लोक लेखा समिति के अध्यक्ष ध्रुव भगत समेत कई आरोपी कोर्ट पहुंच गये. मुख्य आरोपी लालू प्रसाद को रिम्स के सुपर स्पेशियलिटी वार्ड से एंबुलेंस के जरिये कोर्ट ले जाया जा रहा था. लालू प्रसाद कोर्ट पहुंचे भी नहीं थे और उनको दोषी करार दे दिया गया. इसके बाद लालू प्रसाद एंबुलेंस से ही रिम्स लौट गये. इससे पूर्व, लालू का इलाज कर रहे डॉ मृत्युंजय सरावगी ने कहा था कि बिहार के पूर्व सीएम कोर्ट में हाजिर होने की स्थिति में हैं.विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने जब अपना फैसला सुनाना शुरू किया, तो उसके आधार पर रघुवंश प्रस