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झारखंड : सात वन्य अभ्यारण्य इको सेंसेटिव जोन में होंगे शामिल, 929 गांवों में प्रदूषणवाले कारोबार की

रांची : झारखंड के सात वन्य अभ्यारण्य इको सेंसेटिव जोन में शामिल होंगे. इनमें बेतला नेशनल पार्क, गौतम बुद्धा अभ्यारण्य हजारीबाग, पारसनाथ वन्य जीव अभ्यारण्य गिरिडीह, पालकोट वन्य जीव अभ्यारण्य, कोडरमा वन्य जीव अभ्यारण्य, हजारीबाग वन्य जीव अभ्यारण्य व उधवा झील पक्षी अभ्यारण्य शामिल हैं. ये करीब 4341 वर्ग किलोमीटर भू-भाग पर स्थित हैं. इनमें कुल 929 गांव आते हैं. इनके आसपास प्रदूषण आधारित कारोबार की अनुमति नहीं दी जायेगी. इन क्षेत्रों को प्रदूषण से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने वन्य अभ्यारण्यों को इको सेंसेटिव जोन में शामिल करने के लिए तैयार प्रस्ताव का प्रारूप जारी कर दिया है. इसका गजट प्रकाशित कर दिया गया है.

गजट प्रकाशन के 60 दिनों के अंदर इसके प्रारूप पर आपत्ति की जा सकती है. आपत्ति वन विभाग (भारत सरकार) के कार्यालय में या वेबसाइट पर दर्ज की जा सकती है. आपत्ति प्राप्त होने के बाद भारत सरकार इसके प्रारूप पर विचार करेगी. इको सेंसेटिव जोन में शामिल होने के बाद इन सात वन्य अभ्यारण्यों में कई तरह के प्रतिबंध लग जायेंगे. ऐसा कोई काम नहीं हो सकेगा, जिससे अभ्यारण्य के आसपास प्रदूषण हो.

जिले के उपायुक्त होंगे मॉनीटरिंग कमेटी के अध्यक्ष

किसी भी जिले के इको सेंसेटिव जोन के लिए मॉनीटरिंग कमेटी बनायी जायेगी. इसके अध्यक्ष जिले के उपायुक्त होंगे. इसमें उपायुक्तों के प्रतिनिधि, वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रतिनिधि, राजस्व विभाग के प्रतिनिधि, उद्योग विभाग के प्रतिनिधि, सिंचाई विभाग के प्रतिनिधि के साथ-साथ झारखंड राज्य प्रदूषण बोर्ड के क्षेत्रीय पदाधिकारी भी होंगे. सदस्य के रूप में पर्यावरण के क्षेत्र में काम करनेवाली गैर सकारी संस्था के प्रतिनिधि और परिस्थिति विभाग के क्षेत्र में काम करनेवाले विशेषज्ञ भी शामिल होंगे. सदस्य सचिव मुख्य वन संरक्षक होंगे.

60 दिनों के अंदर मांगी आपत्ति कौन-कौन अभ्यारण्य शामिल होंगे

अभ्यारण्य एरिया (वर्ग किमी) गांव की संख्या जिला बेतला टाइगर रिजर्व 1576.45 398 पलामू, लातेहार, गुमला, गढ़वा पालकोट वन्य जीव 1287.16 44 गुमला व सिमडेगा उधवा झील पक्षी 56.94 24 साहेबगंज गौतम बुद्ध वन्य जीव 327.59 102 हजारीबाग और चतरा कोडरमा वन्य जीव 150.628 60 कोडरमा हजारीबाग वन्य जीव 593.48 99 हजारीबाग पारसनाथ वन्य जीव 352.77 202 गिरिडीह व धनबाद इन इलाकों में क्या होगा और क्या नहीं नये खनन, पत्थर उत्खनन और तोड़ने की इकाई, देसी टाइल्स या ईंटों के निर्माण की अनुमति नहीं नयी और पहले से चल रही आरा मशीनों के विस्तार की अनुमति नहीं जल, वायु, मृदा या ध्वनि प्रदूषण करनेवाले उद्योगों की स्थापना की अनुमति नहीं नये वृहत तापीय और जल विद्युत परियोजना की स्थापना शर्तों के आधार पर ही जलावन लकड़ी का वाणिज्यिक उपयोग नियमों के अनुसार ही पर्यटन संबंधी क्रियाकलापों, जैसे रोप-वे, गर्म वायु गुब्बारों आदि का अभ्यारण्य क्षेत्र के ऊपर से उड़ना नियमों के अनुसार ही प्राकृतिक जल निकायों या भू-क्षेत्र में ठोस अपशिष्टों का निस्तारण लागू विधियों के अनुसार

60 दिनों के अंदर मांगी आपत्ति कौन-कौन अभ्यारण्य शामिल होंगे

एक किलोमीटर की परिधि में नये वाणिज्यिक होटलों और विश्रामस्थलों की अनुमति नहीं संरक्षित क्षेत्र की सीमा से एक किलोमीटर के भीतर किसी भी प्रकार के नये वाणिज्यिक सन्निर्माण की अनुमति नहीं

पॉलिथीन बैग का उपयोग प्रतिबंधित :-वर्तमान में अवस्थित होटल और विश्राम स्थल परिसरों को नियमों के अनुसार ही विनियमित रात्रि में व्यावसायिक कार्य के लिए परिचालन की अनुमति नहीं जैविक खेती, ग्रीन टेक्नोलॉजी, वर्षा जल संचयन, गैर प्रदूषण वाले उद्योग, कुटीर उद्योग में ग्रामीण कारीगरों, बायो गैस, सोलर लाइट आदि को बढ़ावा दिया जायेगा