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झारखंड : बैल चरा नवजात को पाल रही दुष्कर्म की शिकार नाबालिग मां

सरायकेला/कुचाई :अधेड़ झोलाछाप चिकित्सक की दरिंदगी का शिकार होकर मां बनी नाबालिग को अब अपनी बच्ची के भविष्य की चिंता सताने लगी है. बमुश्किल दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर पाने वाले गरीब परिवार में असमय ही एक और बच्चा आ जाने से संकट बढ़ गया है. 19 जनवरी को कुचाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्ची के जन्म के बाद सरकारी स्तर से कोई सहायता नहीं मिली, तो नवजात के दूध का जुगाड़ करने के लिए नाबालिग मां खुद ही बैल चराने लगी है.

प्रभात खबर की टीम जब सुबह के वक्त सेलायडीह गांव पहुंची तो नाबालिग अपने तीन कमरे के कच्चे मकान के सामने बच्ची की मालिश कर रही थी. भाई-भाभी मजदूरी के लिए गये थे और माता-पिता घर में मौजूद थे. एक समाजसेवी की मदद से परिवार से बातचीत की गयी तो उनका दर्द छलक पड़ा. पिता ने कहा, ‘अब तक कोई भी सरकारी सहायता नही मिली है. शुरू में (प्रसव के पूर्व दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद) सहायता के नाम पर एसपी और एसडीपीओ ने अपने स्तर से कुछ सहयोग जरूर किया था.’ जिगर के टुकड़े के पेट की आग शांत करने के लिए अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना मजदूरी करने को तैयार नाबालिग के सामने यह भी संकट है कि कम उम्र के कारण न तो मनरेगा और न ही अन्य कोई सरकारी विकास योजना में काम मिल रहा है.गांव के स्कूल में महज दूसरी कक्षा तक पढ़ी लड़की कोई और काम भी नहीं मिल सकता. वह सिर्फ अपना नाम लिखना जानती है. पिता ने कहा, ‘मजबूरी में बैल चराती है और जो पैसे मिलते हैं उसी से नवजात के दूध तीन लाख तक मुआवजे का प्रावधान डीएलएसए की ओर से तीन लाख तक के मुआवजे का प्रावधान है. पहले पुलिस कोर्ट में चार्जशीट दायर करेगी, फिर पीड़िता स

कुलदीप मान, सचिव, डीएलएसए

पीड़िता को मुआवजे का प्रावधान है. इसके लिए कोर्ट में आवेदन दिलाया जा चुका है. जल्द ही चार्जशीट दायर कर दिया जाएगा ताकि जल्द से जल्द किशोरी को मुआवजा मिल सके. पुलिस इस मामले को लेकर संवेदनशील है.