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झारखंड को लालखंड बनाने की दी चेतावनी, पारा शिक्षकों के नेता हिरासत में, सड़क जाम

कुमार विश्वत सेन @ रांचीवेतन वृद्धि समेत तमाम सुविधाओं की मांग कर रहे पारा शिक्षकों का धैर्य अब जवाब दे रहा है. अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रहे पारा शिक्षकों और शिक्षा मित्रों ने शनिवार को चेतावनी दी कि उनकी मांगें नहीं मानी गयीं, तो झारखंड को लालखंड में भी तब्दील किया जा सकता है. इस बीच, पारा शिक्षकों की अगुवाई कर रहे विनोद बिहारी महतो, संजय दुबे समेत पारा शिक्षकों के 4 संगठनों के नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. वहीं, पुलिस की कार्रवाई से नाराज पारा शिक्षकों ने सड़क को जाम कर दिया है.

पारा शिक्षकों के आंदोलन की अगुवाई कर रहे संजय दुबे, विनोद बिहारी महतो व अन्य ने कहा कि वे लोग झारखंड के निवासी हैं. सभी को सम्मान के साथ जीने का संविधान ने हक दिया है. यदि राज्य सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो शांतिपूर्ण आंदोलन हिंसक आंदोलन में भी तब्दील हो सकता है.

पारा शिक्षक संघों के नेताओं ने कहा कि उनकी स्थिति दिहाड़ी मजदूर से भी बदतर है. उन्होंने कहा कि अब तक की तमाम सरकारों ने पारा शिक्षकों और शिक्षा मित्रों को छला है, ठगा है. अर्जुन मुंडा, शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन हों या रघुवर दास. सभी सरकारों ने पारा शिक्षकों को सिर्फ आश्वासन की घुट्टी पिलायी. पहले गठबंधन की सरकार की बात कहकर बरगलाते थे. लेकिन, अब वो स्थिति नहीं है. केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार है. फिर कोई अंतिम फैसला क्यों नहीं लिया जा रहा. शिक्षकों के हित की सरकार अनदेखी क्यों कर रही है.

इससे पहले, छह प्रमुख मांगों के समर्थन में झारखंड के पारा शिक्षकों ने एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष समिति के बैनर तले शनिवार को बड़ा आंदोलन शुरू किया. राज्य की मानव संसाधन विकास मंत्री नीरा यादव के आवास का घेराव करने पहुंचे हजारों पारा शिक्षकों और शिक्षा मित्रों ने सरकार से अपनी मांगें मनवाने का संकल्प लिया. झारखंड के अलग-अलग जिलों से जुटे पारा शिक्षकों और शिक्षा मित्रों ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगें नहीं मानेगी, तो पारा शिक्षक आगामी विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में विधायकों और सांसदों को सबक सिखायेंगे.

अपने तय कार्यक्रम के अनुसार, करीब हजारों पारा शिक्षकों की भीड़ नीरा यादव के आवास की ओर बढ़ने लगी, तो पुलिस और प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर इन्हें रोक लिया. पारा शिक्षकों की भीड़ को विधानसभा मैदान तक सीमित रखा गया है. कड़कड़ाती धूप में पारा टीचर खुले मैदान में अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं. 300 से अधिक जवानों ने पूरे मैदान को चारों ओर से घेर रखा है. 15 डीएसपी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात हैं.

पारा शिक्षक संघर्ष समिति ने दावा किया कि कोडरमा, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद और गिरिडीह से आने वाली कम से कम 20 गाड़ियों को ओरमांझी से आगे नहीं बढ़ने दिया गया. उन्होंने बताया कि इन जगहों से 26 गाड़ियां चली थीं, जिसमें सिर्फ 6 गाड़ियां ही रांची पहुंच पायीं.समिति के अध्यक्ष संजय दुबे ने कहा कि सरकार पारा शिक्षकों और शिक्षा मित्रों के पेट पर लात मारना चाहती है. समिति सरकार के इस दुष्चक्र को सफल नहीं होने देगी. श्री दुबे ने कहा कि सरकार प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है. सरकार कहती है कि पारा शिक्षकों के बूते गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को प्राप्त किया जा रहा है. जब ऐसा है, तो पारा शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों के समान वेतन क्यों नहीं मिलना चाहिए.समिति ने सवाल किया कि जिस राज्य में भविष्य गढ़ने वाले शिक्षकों को उचित सम्मान नहीं मिल रहा, वह राज्य उन्नति के पथ पर कैसे अग्रसर होगा. वह राज्य कैसे विकसित राज्य बन सकता है. पारा शिक्षकों के इस संगठन ने पूछा कि सरकारी शिक्षक की तरह पारा शिक्षक भी बच्चों को पढ़ाते हैं. सरकारी शिक्षक से थोड़ी सी भी कम मेहनत न