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रांची : प्रभारी सार्जेंट मेजर और रीडर पर 3 महिला पुलिसकर्मियों से यौन शोषण का आरोप, IG ने किया था नि

रांची :जामताड़ा की तीन महिला पुलिसकर्मियों से कार्यस्थल पर यौन शोषण करने के आरोपी प्रभारी सार्जेंट मेजर अशोक कुमार और एसपी के रीडर शशि कांत कुशवाहा को निलंबन मुक्त कर दिया गया है. छह मार्च को आइजी कार्मिक शंभू ठाकुर के हस्ताक्षर से दोनों को निलंबन मुक्त करने की अधिसूचना जारी की गयी है. जामताड़ा एसपी डॉ जया रॉय की ओर से गठित आंतरिक कमेटी की रिपोर्ट और दुमका डीआइजी अखिलेश झा की अनुशंसा पर डीजीपी डीके पांडेय की सहमति से ही दोनों का निलंबन वापस लिया गया है. जबकि आइजी सुमन गुप्ता ने अपनी जांच के बाद साक्ष्य के आधार पर दोनों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही चलाने का आदेश दिया था. शिकायत मिलने के बाद उन्होंने ही दोनों को निलंबित किया था. अब दोनों पुलिसकर्मियों का निलंबन मुक्त किया जाना पुलिस विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है.

छह दिसंबर को किये गये निलंबित : जामताड़ा की तीनों महिला पुलिसकर्मियों ने पिछले साल सितंबर में अशोक कुमार और शशि कांत कुशवाहा के खिलाफ कार्यस्थल पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया था. एसपी, डीआइजी, आइजी, डीजीपी, मुख्यमंत्री सहित अन्य अधिकारियों से भी इसकी शिकायत की थी. शिकायत मिलने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए आइजी सुमन गुप्ता ने पिछले साल छह दिसंबर को दोनों को निलंबित कर दिया था. उन्होंने मामले की जांच भी की थी. जांच दौरान उन्होंने दोनों पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ कई साक्ष्य जुटाये थे. उन्होंने दोनों पुलिस कर्मियों को दोषी पाया था. फरवरी में इससे संबंधित रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी थी. दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही का भी निर्देश दिया था.

छह दिसंबर को ही बन गयी आंतरिक जांच कमेटी : छह दिसंबर को आइजी सुमन गुप्ता ने दोनों पुलिसकर्मियों काे निलंबित करने का आदेश दिया था, उसी दिन जामताड़ा एसपी डॉ जया रॉय ने अपने ही नेतृत्व में जांच के लिए आंतरिक कमेटी गठित कर दी. इस कमेटी की प्रजाइडिंग अफसर खुद बन गयी. एसडीपीओ पूज्य प्रकाश और महिला थाना प्रभारी विजया कुजूर को कमेटी का सदस्य बना दिया. इस कमेटी ने आरोपी रीडर शशि कांत कुशवाहा और प्रभारी सार्जेंट मेजर अशोक कुमार को क्लीन चिट दे दी. इससे संबंधित रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेज दी. इसी रिपोर्ट के आधार और डीआइजी की अनुशंसा पर डीजीपी के आदेश से दोनों को निलंबन मुक्त कर दिया गया. दोनों पुलिस पदाधिकारियों को निलंबन मुक्त करने के लिए आइजी सुमन गुप्ता की जांच रिपोर्ट को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया. मामले में जामताड़ा एसपी से संपर्क करने की कोशिश की गयी, पर उनसे बात नहीं हो पायी. जामताड़ा. प्रभारी सार्जेंट मेजर अशोक कुमार और एसपी के रीडर शशिकांत कुशवाहा पर लगा था आरोप डीएसपी पूज्य प्रकाश ने समय पर नहीं की जांच

आइजी सुमन गुप्ता की जांच में पाया गया था कि जामताड़ा में पदस्थापित दो महिला आरक्षी और एक महिला हवलदार ने कार्यस्थल पर यौन शोषण की शिकायत पहले एसपी, डीआइजी, आइजी, डीजीपी, मुख्यमंत्री सहित अन्य अधिकारियों से की थी. इसकी कॉपी स्थानीय प्रेस को भी दी थी. मीडिया में खबर आने के बाद एसपी ने मामले की जांच की जिम्मेदारी सितंबर 2017 में एसडीपीओ पूज्य प्रकाश को सौंपी थी. यह बात सामने आयी कि डीएसपी ने जांच नहीं की. 17 नवंबर 2017 को तीनों महिला पुलिसकर्मियों ने डीएसपी के पास जाकर मौखिक बयान दिया था. फिर 22 नवंबर 2017 को लिखित बयान भी दिया. लेकिन एसडीपीओ ने समय पर जांच नहीं की.

एसपी, डीएसपी और थानेदार काे किया था शो-कॉज मामले में द सेक्सुअल हरासमेंट ऑफ ओमेन एट वर्क प्लेस एक्ट 2013 की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन मानते हुए आइजी सुमन गुप्ता ने एसपी डॉ जया रॉय, एसडीपीओ पूज्य प्रकाश, नारायणपुर थाना प्रभारी सुरेंद्र प्रसाद को शो-कॉज किया था. मामले में डीआइजी दुमका को भी कार्रवाई का निर्देश दिया था. जामताड़ा एसपी डॉ जया राॅय द्वारा गठित आंतरिक कमेटी की रिपोर्ट और दुमका डीआइजी अखिलेश झा की अनुशंसा के बाद पुलिस मुख्यालय के वरीय अधिकारियों के स्तर पर रीडर और प्रभारी सार्जेंट मेजर को निलंबन मुक्त करने का निर्णय लिया गया.

आंतरिक कमेटी ने रीडर और प्रभारी सार्जेंट मेजर के ऊपर लगाये गये आरोप की पुष्टि होने का साक्ष्य नहीं पाया था. इसी आधार पर दोनों को निलंबन मुक्त करने की अनुशंसा वरीय अधिकारियों से की गयी थी. -अखिलेश झा, डीआइजी, दुमका रेंज