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झारखंड : टाटा ने भूषण स्टील के लिए लगायी बड़ी बोली, बकाया कर्ज 50,000 करोड़, पढ़ें पूरी खबर

रांची/नयी दिल्ली : टाटा स्टील ने भूषण पावर एंड स्टील को खरीदने के लिए सबसे ऊंची करीब 35,000 करोड़ की बोली लगायी है. जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड दूसरे स्थान पर रही, इस कंपनी ने 29,700 करोड़ की बोली लगायी. टाटा स्टील ने तीन फरवरी को 24,000 करोड़ की शुरुआती बोली लगायी थी. टाटा अगर भूषण स्टील का अधिग्रहण करने में सफल होती है, तो उसकी क्षमता 43% बढ़ कर 18.6 मिलियन टन प्रति वर्ष हो जायेगी. टाटा स्टील ने बीएसइ में इसकी सूचना भी दी है. टाटा स्टील के अनुसार उसे भूषण स्टील के रिजोलोशन प्रोफेशन से यह सूचना मिली है कि नियंत्रणकारी हिस्सेदारी हासिल करने को लेकर सर्वाधिक बोली लगानेवाली कंपनी के रूप में टाटा स्टील उभरी है.

भूषण स्टील कोल्ड रोल्ड प्रोडक्ट्स का उत्पादक है, जिसकी स्टील बनाने की क्षमता 5.6 मिलियन टन प्रति वर्ष है. भूषण स्टील से बकाया वसूली के लिए एनसीएलटी का रुख किया : लार्सन एंड टुब्रो ने कर्ज के बोझ तले दबी भूषण स्टील से अपने बकाये की वसूली के लिए एनसीएलटी का दरवाजा खटखटाया है. उसने राष्ट्रीय कंपनी विधि प्राधिकरण की पीठ के समक्ष कहा कि पूंजीगत सामान की आपूर्ति का भूषण स्टील पर 900 करोड़ रुपये का बकाया है. उसे भूषण स्टील के सुरक्षित ऋणदाता के तौर पर माना जाना चाहिए. पीठ ने इस मामले में समाधान पेशेवरों से अपना पक्ष रखने को कहा है. न्यायाधिकरण ने भूषण स्टील मामले में एल एंड टी की याचिका को 23 मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है.

बकाया कर्ज 50,000 करोड़

भूषण स्टील लिमिटेड उन 12 डिफॉल्ट खातों में से एक है, जिसकी पहचान भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से की गयी थी. कंपनी में कुल एनपीए की 25 फीसदी देनदारी बकाया है. भूषण स्टील का बकाया कर्ज 50,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें बैंकों का बकाया 44000 करोड़ रुपये के स्तर पर है.

झारखंड में 7000 करोड़ के निवेश के लिए एमओयू किया था

भूषण स्टील लिमिटेड नयी दिल्ली ने 3.1 मिलियन टन क्षमता के इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट व 300 मेगावाट के कैप्टिव पावर प्लांट की स्थापना के लिए चार जनवरी 2008 को झारखंड सरकार के साथ एमओयू किया था. कंपनी ने सात हजार करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया था. आरंभ में कंपनी ने पूर्वी सिंहभूम के गालुडीह में प्लांट लगाने की बात कही थी. फिर गोला में लगाने की बात कही. पर भूमि अर्जन की दिशा में कोई काम नहीं किया गया. कंपनी की कोई प्रगति न देख तत्कालीन उद्योग सचिव एपी सिंह ने 15.10.2012 को एमओयू रद्द कर दिया था.

झारखंड में 7000 करोड़ के निवेश के लिए एमओयू किया था