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जानिए, झारखंड में आखिर क्‍यों गुस्‍से में हैं गजराज, किस पर ढाया कहर

आनंद मिश्र, रांची।झारखंड के जंगलों में विचरण करने वाले गजराज लगातार गुस्‍से में हैं। इनका गुस्सा चरम पर हैं। लगातार कटते जंगल के कारण यहां के जंगलों में हाथियों की भूख शांत नहीं हो रही है। यही कारण है कि खाने की तलाश में गजराज बाहर निकलते हैं और इसकी परिणति भयावह घटनाओं के रूप में सामने आती है। हाथी और मानव के टकराव की घटनाओं में ग्रामीणों की हो रही मौत इस बात की गवाही दे रही हैं। साल दर साल इसमें इजाफा हो रहा है। झारखंड में अप्रैल-17 से दिसंबर तक पिछले नौ माह में मानव-हाथी के आपसी टकराव में 63 लोगों की मौत हुई है, वहीं 93 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। गजराजों के गुस्‍से के कारण ही राज्‍य गठन के बाद से अब तक हाथियों ने 1232 लोगों की जान ले ली। स्पष्ट है कि प्रति वर्ष औसतन 70 लोग हाथियों के गुस्से का शिकार हो रहे हैं।

गजराजों का गुस्‍सा किसानों पर भी कहर बनकर टूटा है। भूख शांत करने जंगल से भटके गजराज जहां किसानों की फसल चट कर गए वहीं व्‍यापक स्‍तर पर फसल को रौंद डाला, किसानों के आशियाने को तहस-नहस कर दिया। यही कारण है कि फसल क्षति के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। अप्रैल से दिसंबर-17 तक हाथियों द्वारा फसल, पशु, मकान और अनाज की क्षति के कुल 4001 मामले सामने आए हैं।

हाथियों के संरक्षण से अधिक मुआवजा देने में खर्च हो रही राशि

आलम यह है कि राज्य सरकार हाथियों के संरक्षण पर जितनी राशि खर्च कर रही है उससे कहीं अधिक राशि उसे लोगों की मौत और फसल क्षति के मुआवजे के एवज में चुकानी पड़ रही है। जंगली जानवर से हुए टकराव के एवज में हुई मौत पर सरकार के स्तर से चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। जबकि घायल होने या फसल क्षति के लिए क्षति की स्थिति को देखते हुए अलग-अलग राशि का प्रावधान किया गया है। लोगों की मौत और फसल क्षति के मद में पिछले नौ माह में 6.99 करोड़ का भुगतान किया गया है। इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक यह आंकड़ा बढऩे की संभावना हैं।

झारखंड में हाथियों के संरक्षण और उनके उचित प्रवास के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से हाथी परियोजना चलाई जा रही है। इस परियोजना के तहत 15 जनवरी 2018 तक महज 10.655 लाख रुपये ही खर्च किए गए हैं। वन विभाग की खुद की रिपोर्ट इसकी पुष्टि कर रही है। वहीं, दिसंबर तक इसी विभाग के द्वारा हाथियों से हो रही क्षति के मुआवजे के मद में 6.99 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। स्पष्ट है कि हाथियों के संरक्षण और उनके उचित प्रवास के 70 गुना राशि मुआवजे के मद में व्यय की गई है। यहां यह भी बता दें कि हाथी परियोजना के लिए इस वित्तीय वर्ष 2.60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

रांची प्रक्षेत्र : 18 दुमका प्रक्षेत्र : 16 सिंहभूम प्रक्षेत्र : 14 पलामू प्रक्षेत्र : 01 हजारीबाग : 03 बोकारो : 09 व्याघ्र परियोजना डालटनगंज : 02 कुल : 63