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जानिए, विदेश में फंसे तो कैसे आपकी मदद के लिए आ जाएगा 'सिकंदर'

गिरिडीह,[दिलीप सिन्हा] ।स्नातक पास बगोदर के युवक सिकंदर अली ने अपने काम से सेवा की मिसाल पेश की है। सात समंदर पार विदेशों में काम करने गए मजदूरों को जब कोई दिक्कत होती है या किसी कारणवश मौत हो जाती है तब सिकंदर मददगार बन जाता है। अब तक विदेश से 60 से अधिक मजदूरों की स्वदेश वापसी और एक दर्जन मजदूरों के शव मंगवाने में सिकंदर ने अहम भूमिका निभाई है। इनकी मदद के लिए वाट्सएप ग्रुप भी बनाया है। इसमें जनप्रतिनिधि, चिकित्सक, इंजीनियर, वकील समेत अन्य गण्‍यमान्य लोग हैं। जो आपस में सहयोग कर दुखी परिवार को मदद देते हैं। परेशान परिवार का दुख दर्द शिद्दत से सरकार तक पहुंचाते हैं। तीन साल से सिकंदर इस काम में तल्लीन है।

प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए ऐसे मिली प्रेरणा

सिकंदर बताते हैं कि सउदी अरब, मलेशिया, कुवैत, श्रीलंका समेत कई देशों में काम कर रहीं टावर कंपनियों में गिरिडीह के बगोदर एवं हजारीबाग के मांडू और विष्णुगढ़ के कई लोग काम करते हैं। इन्हें एजेंट के माध्यम बतौर मजदूर वहां बुलाया जाता है। वहां जाकर कई मजदूर फंस जाते हैं। कार्य के दौरान मौत भी हो जाती है। मुआवजा देने से बचने के लिए कंपनियां ऐसी स्थिति में मजदूर से ही पल्ला झाड़ लेतीं हैं। नतीजा मजदूर का शव महीनों वहां ही पड़ा रहता है। यहां परिजन बिलखते रहते हैं। 2015 में मलेशिया में यहां के 38 मजदूर फंस गए थे। तब सिकंदर ने दुखी परिजनों की मदद का बीड़ा उठाया।

प्रवासी वाट्सएप ग्रुप लगा रहा संवेदनाओं का मरहम

सिकंदर ने इन मजदूरों की मदद को डिजिटल तकनीक का सहारा लिया। प्रवासी वाट्सएप ग्रुप बनाया। सदन में बैठकर जो काम जनप्रतिनिधि नहीं कर पा रहे थे वह यह ग्रुप कर रहा है। प्रवासी मजदूरों की यह आवाज बन गया है। विदेशों में फंसे मजदूरों की सकुशल वापसी, शव को वहां से लाने एवं मृत मजदूरों के बच्चों की शिक्षा जैसे काम सिकंदर और उनके ग्रुप के साथी कर रहे हैं। इसमें जो राशि लगती है उसे इसी वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से जुटाया जाता है। आज आलम ये है कि विदेश में जब कोई मजदूर फंसता है तो परिजन सिकंदर अली से संपर्क करते हैं।

केस-1

बगोदर के पोखरिया निवासी कृष्णा महतो की मौत कुवैत में हो गई। प्रवासी ग्रुप के प्रयास से ढाई माह बाद शव बगोदर लाया जा सका। उसका बेटा साहिल इस बीच बेहद बीमार हो गया। तब इलाज के लिए 51 हजार रुपये जुटाकर उसकी मां को सिकंदर ने दिए। धन संग्रह के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम किया। साहिल की शिक्षा की जिम्मेदारी संत पॉल स्कूल बगोदर के निदेशक हफीज अंसारी ने ली। डॉ. कमरुद्दीन ने साहिल का नि:शुल्क इलाज किया।

केस-1

बगोदर गोपालडीह के नुनूचंद महतो का निधन सउदी अरब में हो गया। नियोजन देनेवाली कंपनी ने शव भेजने से इन्‍कार कर दिया। महीनों बाद शव बगोदर लाया जा सका। प्रवासी मजदूर वाट्सएप ग्रुप की अपील पर विदेशों में काम करनेवाले कई मजदूरों ने सहयोग किया। नुनूचंद के परिजनों को एक लाख 70 हजार रुपये का सहयोग किया। कंपनी ने कोई मुआवजा नहीं दिया। नुनूचंद की बेटी की शिक्षा का प्रबंध प्रवासी ग्रुप ने किया।

माता-पिता की नसीहत पर चल रहे सिकंदर:-रांची विश्वविद्यालय से स्नातक सिकंदर का जन्म बगोदर के बेको गांव में वर्ष 1982 में हुआ था। उनके पिता निजामुद्दीन अंसारी राशन की दुकान चला रहे हैं। इसमें सिकंदर भी उनका साथ देते हैं। मां जुलेखा और पिता निजामुद्दीन ने बचपन से दीन दुखियों की सेवा की नसीहत दी। कहा कि परेशान व्‍यक्ति किसी भी धर्म का हो उनकी सेवा से सबाब मिलता है। माता-पिता की कही बात को सिकंदर ने गांठ बांध लिया। उसी का परिणाम है कि वे विदेशों में काम के लिए जानेवाले मजदूरों की मुसीबत के समय मददगार बनते हैं। विदेश में मजदूर का कोई अपना नहीं होता। वे मुसीबत में फंसते हैं तो उनकी मदद से आत्मसंतोष मिलता है। सरकार भी इन मजदूरों के दुखदर्द में मदद करें। उनको विदेश में उचित वेतन और कठिनाई के वक्त वहां सहायता मिले, इस दिशा में राज्य व केंद्र सरकार सटीक कदम उठाए। साथ ही विदेश में जान गंवानेवाले मजदूरों को उचित मुआवजा भी दिलाए। मुसीबत में फंसा कोई भी व्‍यक्ति किसी भी धर्म का हो उसकी पूरी मदद करने का जी-जान से प्रयास किया जाता है- सिकंदर अली, बगोदर, गिरिडीह