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IAS के इंटरव्यू में पूछा - दीपिका पादुकोण की फिल्म पद्मावत कैसी लगी? जानिए जवाब

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के आखिरी चरण यानी इंटरव्यू में सबसे अहम भूमिका आपके डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म (डीएएफ) की होती है। आपका डीएएफ आपके बारे में बहुत कुछ बता देता है। इंटरव्यू से पहले सभी उम्मीदवारों से यह भरवाया जाता है। इसमें आपके ऐकेडमिक, पर्सनल बैकग्राउंड, आपकी पसंद, नापसंद, हॉबी और ऑवरऑल पर्सनैलिटी सबकी जानकारी होती है। इंटरव्यू के दौरान इसकी एक कॉपी सभी पैनलिस्ट (जो इंटरव्यू ले रहे हैं) के पास भी होती है। इंटरव्यू में अधिकांश सवाल आपके द्वारा डीएएफ में दी गई जानकारी से ही पूछे जाते हैं।

ऐसे ही एक सिविल सेवा परीक्षा इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवार से पूछ लिया गया- 'आपको फिल्म पद्मावत कैसी लगी?' ये इंटरव्यू था उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले सूरज कुमार का, जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2017 में 117वीं रैंक हासिल की। अपने डीएएफ में सूरज ने लिखा था - उन्हें फिल्में देखने का शौक है। सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू में उनसे इसी हॉबी से जुड़ा एक सवाल पूछ लिया गया।

आगे का इंटरव्यू पढ़ें - सूरज की ही जुबाऩी.

मुझे पूछा गया- 'आपने आखिरी फिल्म कौन सी देखी थी?' मैंने उत्तर दिया- पद्मावत। तो मुझसे पद्मावत का क्रिटिकल रिव्यू पूछा गया। पूछा गया कि आपको पद्मावत मूवी कैसी लगी? मैंने उत्तर दिया कि फिल्म के टेक्निकल पार्ट, कॉस्ट्यूम, सेट्स डिजाइन, विजुअल बहुत शानदार और उम्दा थे। लेकिन कहानी थोड़ी और कसी हुई हो सकती थी।

तो मुझसे पूछा गया कि फिल्म की कहानी में क्या दिक्कत थी? मैंने उत्तर दिया कि इस फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों का ख्याल नहीं रखा गया। ये मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा लिखित पद्मावत से अलग थी। और फिर जब ऐतिहासिक तथ्यों को हिलाया गया है, तो नाम यह यूज नहीं करना चाहिए था। नाम कोई दूसरा रखा जा सकता था। कहानी सबको पता थी, बस इसे लंबा खींच दिया गया।

अपने इस उत्तर को पॉजिटिव नोट के साथ खत्म करते हुए सूरज ने अंत में कहा- इस फिल्म में आर्ट एंड डिजाइन का काम काफी अच्छा था। सूरज ने मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसके पहले इनका चयन सहायक कमांडेंट के पद पर हुआ था और 7 मई को कार्यभार ग्रहण करना था। इससे पहले आईएएस में चयन हो गया।

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को संदेश देते हुए सूरज ने कहा कि पढ़ाई के लिए घंटे कोई मायने नहीं रखता। जितने समय पढ़ाई करते हैं उसमें ध्यान लगना ज्यादा मायने रखता है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ मेरी रूचि हिन्दी कविता और उर्दू गजल सुनने में ज्यादा रही।