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हमारे संविधान में नहीं है ‘बजट’ शब्द का जिक्र, जानें इसे क्या कहते हैं

नई दिल्ली (हरिकिशन शर्मा) वित्त मंत्री अरुण जेटली एक फरवरी 2018 को आम बजट 2018-19 पेश करेंगे। मोदी सरकार के कार्यकाल का यह अंतिम पूर्ण बजट होगा जबकि ऐतिहासिक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद यह पहला आम बजट है।

वित्त मंत्री हर साल फरवरी के महीने में देश का आम बजट पेश करते हैं। पहले आम बजट फरवरी के अंतिम दिन यानी 28 या 29 फरवरी को आता था। पिछले साल से आम बजट एक फरवरी को पेश करने की परंपरा शुरु हुई। लेकिन यह जानकर आपको हैरानी होगी कि देश के संविधान में ‘बजट’ शब्द का जिक्र ही नहीं है। दरअसल संविधान में कहा गया है कि सरकार हर साल संसद के समक्ष अपना ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ पेश करेगी। इसके ही लोकप्रिय भाषा में बजट कहा जाता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत केंद्र सरकार को हर साल संसद के दोनों सदनों के समक्ष सालाना वित्तीय विवरण रखना चाहिए। वार्षिक वित्तीय विवरण में तीन अलग अलग भागों में सरकार की आमदनी और खर्च का ब्यौरा होता है। ये तीन हैं: (1) भारत की संचित निधि (2) भारत की आपात निधि (3) लोक लेखा। वैसे संसद के वित्तीय कामकाज में मुख्यतौर पर आम बजट, अनुदान की मांगें, लेखानुदान, अनुदान की पूरक मांगें, विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक हैं।

अब नहीं आता रेल बजट

पहले केंद्र सरकार का बजट दो हिस्सों में संसद में पेश किया जाता था। रेल बजट व आम बजट। रेल बजट सामान्यत: आम बजट से दो दिन पूर्व पेश किया जाता था। हालांकि पिछली बार से सरकार ने रेल बजट को आम बजट में ही समाहित कर दिया है। इस तरह अब अलग से रेल बजट पेश नहीं होता है। अंतिम रेल बजट पेश करने वाले रेल मंत्री सुरेश प्रभु हैं। संविधान के प्रावधानों के अनुरूप 31 मार्च से पहले अनुदान की मांगें पारित हो जानी चाहिए ताकि नये वित्त वर्ष में संचित निधि से धन निकालने में दिक्कत न आये। इसके अलावा आम बजट में कर प्रस्ताव पेश होने के 75 दिन के भीतर वित्त विधेयक पारित हो जाना चाहिए।

अब नहीं आता रेल बजट