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क्या बजट 2018 में आपको मिलेगी आयकर में राहत, ये हैं बजट से जुड़ी टैक्सपेयर की 5 उम्मीदें

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)।29 फरवरी को इकोनॉमिक सर्वे पेश कर दिए जाने के बाद अब देश के लोगों को अरुण जेटली के आम बजट 2018 से उम्मीदें बढ़ गई हैं। हर बार की ही तरह आम लोगों को सबसे ज्यादा दरकार टैक्स संबंधी राहत की है। बजट सीरीज की इस खबर में हम आपको बताएंगे कि आखिर देश का आम करदाता अरुण जेटली के पिटारे से किन सौगतों की उम्मीद लगाए बैठा है।

आयकर स्लैब में मिले राहत:

आयकर कानून के हिसाब से मौजूदा समय में 2.50 लाख तक की सालाना आय ही कर छूट के दायरे में आती है। लेकिन इस बार करदाता चाहता है कि इस सीमा को बढ़ाकर 3 लाख कर दिया जाए। इस बार के बजट में इस इजाफे की उम्मीद इसलिए ज्यादा है क्योंकि साल 2017 के आम बजट में टैक्स स्लैब में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया था, हालांकि उन छोटे करदाताओं को जरूर 10 फीसद के टैक्स स्लैब से 5 फीसद के स्लैब में लाया गया था जिनकी सालाना आय 2.50 लाख से 5 लाख के बीच थी।

मेडिकल रींबर्समेंट की सीमा बढ़े:

मौजूदा समय में मेडिकल रींबर्समेंट की सीमा 15,000 रुपए निर्धारित है। ऐसे में टैक्सपेयर चाहते हैं कि इस सीमा में इजाफा किया जाए। अगर इस सीमा को बढ़ाकर 50,000 रुपए सालाना किया जाता है तो यह नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी राहत हो सकती है।

80सी का दायरा बढ़ाया जाए:

आयकर की धारा 80सी के तहत करदाता 1 लाख 50 हजार तक की कर छूट का दावा कर सकते हैं। इस सीमा में बीते 8 से 10 सालों के दौरान कोई इजाफा नहीं हुआ है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इसे बढ़ाकर 2 लाख किया जा सकता है। अगर जेटली अपने बजट में ऐसा करते हैं तो हर टैक्सपेयर को कुछ न कुछ राहत मिल सकती है।

80सी का दायरा बढ़ाया जाए:

मौजूदा नियमों के हिसाब से अगर आप मेट्रो शहरों मसलन मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई में रहते हैं तो आप अपनी सैलरी के 50 फीसद हिस्से के बराबर एचआरए पाने के हकदार होते हैं वहीं नॉन मेट्रो शहरों के लिए यह सीमा सैलरी के 40 फीसद की है। हालांकि बैंगलुरू और हैदराबाद जैसे शहरों में मकान के किराए भी मेट्रो शहरों से कुछ कम नहीं हैं लिहाजा नौकरीपेशा लोगों को उम्मीद है कि इन जैसे शहरों को भी हायर एचआरए की श्रेणी में शामिल करना चाहिए। अगर ऐसा होता है को टैक्स पेयर को इस मोर्चे पर भी राहत मिल सकती है।

कैपिटल गेन टैक्स की होल्डिंग पीरियड हो कम: टैक्सपेयर चाहते हैं कि कैपिटल गेन टैक्स की होल्डिंग पीरियड को कम किया जाए। आयकर अधिनियम की धारा 54 और 54F के मुताबिक अगर कोई एक आवासीय संपत्ति की खरीद करता है तो उसको करीब 3 साल तक अपने पास रखना होता है उसी के बाद वो उस पर कैपिटल गेन टैक्स में छूट का फायदा उठा सकता है। टैक्स पेयर को उम्मीद है कि इसे घटाकर 2 साल कर दिया जाना चाहिए। जान लीजिए क्या होता है कैपिटल गेन टैक्स: कोई भी प्रॉफिट या लाभ जो कि किसी कैपिटल एसेट्स (पूंजीगत परिसंपत्ति) की बिक्री के जरिए प्राप्त किया जाता है उसे कैपिटल गेन कहा जाता है। इस लाभ या मुनाफे पर उस वर्ष कर देनदारी बनती है जब संपत्ति का लेनदेन हुआ हो। हालांकि पैत्रक परिसंपत्तियों पर कैपिटल गेन टैक्स लागू नहीं होता है। आयकर की धाराओं के तहत कैपिटल गेन टैक्स बचाने की सुविधाएं भी दी गई हैं। आयकर की धारा 54, 54EC और 54F इस मामले में करदाताओं की मदद कर सकती हैं। अगर आप किसी अचल संपत्ति (हाउस प्रॉपर्टी) की बिक्री करते हैं तो उसके लिए सेक्शन 54 की मदद ले सकते हैं। सेक्शन 54F की मदद से आप हाउस प्रॉपर्टी के अलावा अन्य