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अब आपके लिए चीनी की मिठास होगी कम, नए सेस से बढ़ सकती है कीमत

केंद्र सरकार के एक फैसले से जल्द ही आपके लिए चीनी की मिठास कम हो सकती है. केंद्र सरकार शुगर सेस लाने की योजना में है. अगर ऐसा हुआ तो यह मौजूदा जीएसटी के अलावा पांच फीसदी और होगा. अटॉर्नी जनरल ने जीएसटी काउंसिल को शुगर सेस के लिए हरी झंडी दे दी है. अगर यह लागू हुआ तो चीनी के दामों में बढ़ोतरी होगी. बता दें कि यह सेस गन्ना किसानों की मदद के लिए फंड बनाने को लगाए जाने की योजना है.

मई में जीएसटी काउंसिल ने शुगर सेस लाने के प्रस्ताव पर चर्चा की थी. इस सेस का मकसद फसल का भुगतान देर से पाने वाले गन्ना किसानों की मदद करना था. इस फैसले को कानूनी आधार पर पुख्ता करने के लिए ग्रुप ऑफ स्टेट मिनिस्टर्स (GoSM) ने जीएसटी काउंसिल के साथ अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से इस पर कानूनी राय ली थी. इस पर अटॉर्नी जनरल ने हरी झंडी दे दी है.

कहा जा रहा है कि अटॉर्नी जनरल ने अपनी कानूनी सलाह में इस प्रस्ताव को हरी झंडी इस आधार पर दी है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही जीएसटी के अधीन सेस को संचालित करने वाले कानून की संवैधानिक वैधता बरकरार रख चुका है. कंपन्सेशन टू स्टेट्स एक्ट 2017 के अधीन सेस का मामला एक समय में जीएसटी के पांच तत्वों में से एक था जिन्हें सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट के फेवर में फैसला देते हुए एक याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि सेस से राज्यों को अनुदान दिया जाएगा. चार मई की बैठक में जीएसटी काउंसिल ने शुगर सेस पर सहमति बनाने के लिए एक GoSM के गठन की घोषणा की थी. अब इसे अटॉर्नी जनरल की ओर से हरी झंडी मिल गई है. अब असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा इस प्रस्ताव से सभी पहलुओं का अध्ययन करेंगे जिसके बाद जीएसटी काउंसिल से इसकी औपचारिक सहमति ली जाएगी.

2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को देखते हुए केंद्र और बीजेपी शासित राज्यों ने गन्ना किसानों के लिए 7000 करोड़ रुपये का फंड बनाने के प्रस्ताव का समर्थन किया था. शुगर सेस में प्रस्ताव है कि इसके लागू होने से चीनी की आपूर्ति में तीन रुपये प्रति किलो से ज्यादा की बढ़ोतरी नहीं होनी चाहिए

केंद्र सरकार शुगर सेस से आई रकम को एक फंड में रखेगी और इससे गन्ना किसानों की मदद की जाएगी. शुगर सेस का मूल प्रस्ताव उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने दिया था. मंत्रालय के अनुसार पिछले साल शुगर मिलों पर किसानों का 9500 करोड़ रुपये बकाया था, लेकिन 31 जनवरी 2018 तक यह बढ़कर 19 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. हालांकि, 30 सितंबर 2018 तक 11,700 करोड़ रुपये आ गया था. शुगर सेस एक नया प्रस्ताव है. इससे पहले शुगर डेवलपमेंट फंड एक्ट 1982 कई सालों तक लागू था, लेकिन 2017 में इसे खत्म कर दिया गया था.