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बैंक कर्मचारियों की दो दिन की हड़ताल से प्रभावित हुईं बैंकिंग सेवाएं

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के करीब दस लाख कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से देश भर में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हुई हैं। बैंकों के संगठन इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आइबीए) द्वारा महज दो फीसद वेतन वृद्धि दिए जाने के विरोध में कर्मचारी 30 और 31 मई को देशव्यापी हड़ताल पर हैं। हालांकि नई पीढ़ी के प्राइवेट बैंक जैसे आइसीआइसीआइ बैंक, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक का कामकाज कमोबेश सामान्य रहा लेकिन चेक क्लियरिंग सेवाएं प्रभावित हुईं।

80 फीसद एटीएम चालू रहे:

आधिकारिक अनुमान के अनुसार सिर्फ 25 फीसद बैंक शाखाओं में बुधवार को सामान्य कामकाज हो सका। हालांकि 80 फीसद एटीएम चालू रहे और लोगों को नकदी निकासी की सुविधा मिलती रही। कुछ राज्यों में बैंकिंग कामकाज पर ज्यादा असर होने की खबर है। इन राज्यों में केरल, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड प्रमुख हैं।

ऑल इंडिया बैंक इंप्लॉईज एसोसिएशन (एआइबीईए) के एक बयान के अनुसार हड़ताल में करीब दस लाख बैंक कर्मचारी शामिल हैं। ये कर्मचारी 21 सार्वजनिक बैंकों के अलावा पुरानी पीढ़ी के 13 प्राइवेट बैंक, छह विदेशी बैंकों और 56 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में कार्यरत हैं। आइबीए की ओर से महज दो फीसद वेतन वृद्धि की पेशकश के विरोध में हड़ताल की गई है। एआइबीईए कर्मचारी संगठनों के संयुक्त फोरम यूएफबीयू का घटक है।

इंटरनेट बैंकिंग का सहारा:

चूंकि हड़ताल ऐसे समय में हुई है जब महीने के अंत में बैंक शाखाओं से वेतन निकाला जाता है। हड़ताल से कर्मचारियों को वेतन मिलने में दिक्कत आ सकती है। कई एटीएम इसी वजह से जल्दी खाली हो गए। भारतीय रिजर्व बैंक के एक अधिकारी ने कहा कि इंटरनेट बैंकिंग के जरिये ग्राहकों को कुछ सेवाएं मिलती रहीं लेकिन हड़ताल के कारण बैंकों के सामान्य कामकाज पर असर पड़ा है। बैंकों के कुल कामकाज में डिजिटल बैंकिंग का योगदान महज पांच फीसद है। आरबीआइ में कामकाज सामान्य रहा। हालांकि उसके कर्मचारियों के संगठनों ने बैंक हड़ताल को नैतिक समर्थन दिया है।

इंटरनेट बैंकिंग का सहारा:

इस बीच, उद्योग संगठन एसोचैम ने कहा है कि दो दिन की बैंकिंग हड़ताल से 20000 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन प्रभावित हो सकते हैं। उसने सरकार से अपील की है कि सार्वजनिक बैंकों की वित्तीय हालत सुधारने के लिए राहत पैकेज दिया जाए। बैंकों का एनपीए (फंसे कर्ज) बढ़ने और इसके लिए रकम की व्यवस्था करने के कारण बैंकों को जबर्दस्त घाटा हो रहा है। बीती मार्च तिमाही में सरकारी बैंकों का घाटा 50,000 करोड़ रुपये रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। दिसंबर 2017 तिमाही में सरकारी बैंकों का कुल घाटा 19,000 करोड़ रुपये था।

एआइबीईए के महासचिव सी. एच. वेंटकचलम ने कहा कि बैंकों और कर्मचारियों के संगठनो के बीच वेतन पर कई दौर की वार्ताएं हुईं लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई। आइबीए सिर्फ दो फीसद वेतन वृद्धि देना चाहती है जबकि कर्मचारी संगठनों ने 15 फीसद वृद्धि की मांग की है। कर्मचारियों का वेतन संशोधन 2012 के बाद होना है।