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चुनाव से पहले व्यापारियों के लिए और सरल होगा GST, सिंगल पेज का होगा रिटर्न

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)।आम चुनाव से पहले व्यापारियों की नाराजगी दूर करने के लिए जीएसटी को और सरल बनाया जा सकता है। रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ जीएसटी कानून के विवादित प्रावधानों में संशोधनों सहित कई ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं जिससे जमीनी स्तर पर छोटे और मझोले व्यापारियों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

सूत्रों ने कहा कि अगले कुछ महीनों में कई ऐसे उपाय देखने को मिल सकते हैं जिनसे जीएसटी का अनुपालन बेहद आसान हो जाएगा। इनमें सबसे महत्वपूर्ण कदम सिंगल पेज का जीएसटी रिटर्न होगा। जीएसटी काउंसिल इस पर आगामी बैठक में मुहर लगा सकती है। इसके बाद जीएसटी कानून के विवादित प्रावधानों में संशोधन पर जोर दिया जाएगा। रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म ऐसा ही एक प्रावधान है जिसे लेकर व्यापारी और उद्योग जगत ने विगत में चिंता जताई है।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया टेडर्स के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने ‘दैनिक जागरण’ से कहा कि व्यापारियों की पहली समस्या ई-वे बिल से संबंधित है, यह आसानी से जनरेट नहीं हो रहा है। दूसरी समस्या एचएसएन कोड की है क्योंकि बहुत से व्यापारियों को अभी इसके बारे में जानकारी नहीं है। तीसरी समस्या टैक्स रेट को लेकर है, बहुत से व्यापारियों को कुछ चीजों को लेकर अब भी भ्रम है। चौथी समस्या जीएसटी पोर्टल की है क्योंकि पोर्टल पर कुछ चीजें अपलोड हो पाती हैं जबकि कुछ रह जाती हैं। पांचवी दिक्कत रिटर्न की जटिलता है।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया टेडर्स के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने ‘दैनिक जागरण’ से कहा कि व्यापारियों की पहली समस्या ई-वे बिल से संबंधित है, यह आसानी से जनरेट नहीं हो रहा है। दूसरी समस्या एचएसएन कोड की है क्योंकि बहुत से व्यापारियों को अभी इसके बारे में जानकारी नहीं है। तीसरी समस्या टैक्स रेट को लेकर है, बहुत से व्यापारियों को कुछ चीजों को लेकर अब भी भ्रम है। चौथी समस्या जीएसटी पोर्टल की है क्योंकि पोर्टल पर कुछ चीजें अपलोड हो पाती हैं जबकि कुछ रह जाती हैं। पांचवी दिक्कत रिटर्न की जटिलता है।जीएसटी लागू होने के बाद गुजरात और महाराष्ट्र सहित कई जगह व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किया था। ऐसे में सरकार का पूरा फोकस चुनाव से पहले व्यापारियों की शिकायतें दूर करने पर रहेगा।

इंटर-स्टेट ई-वे बिल सफलतापूर्वक लागू करने के बाद सरकार अब चरणबद्ध ढंग से अलग-अलग राज्यों में इंट्रा-स्टेट कारोबार के लिए ई-वे बिल लागू करने जा रही है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए 25 अप्रैल से चार और राज्यों तथा एक केंद्र शासित प्रदेश में भी इंट्रा-स्टेट ई-वे बिल लागू हो जाएगा। अब तक 12 राज्यों में इंट्रा-स्टेट ई-वे बिल लागू हो चुका है।वित्त मंत्रलय के अनुसार तीसरे चरण में मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मेघालय तथा पुडुचेरी में इंट्रा-स्टेट ई-वे बिल लागू हो जाएगा। मालूम हो कि एक अप्रैल 2018 से देशभर में इंटर-स्टेट व्यापार के लिए ई-वे बिल लागू हुआ था। इसके बाद दो चरणों में आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में ई-वे बिल लागू किया गया।