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बिहार: फर्जी डिग्री लेकर डॉक्टर ने किया था ऑपरेशन, 20 साल बाद मिली सजा

फास्ट ट्रैक कोर्ट टू ने 20 साल बाद शुक्रवार को एमबीबीएस के फर्जी डिग्री लेकर ऑपरेशन करनेवाले बीके मिश्रा को सात साल की सजा सुनाई। ऑपरेशन में शामिल रहीं मिश्रा की पत्नी उर्मिला मिश्रा भी इस मामले में अभियुक्त थीं, लेकिन ट्रायल के दौरान उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में मिश्रा पर 2800 रुपये का जुर्माना लगाया गया। अपर लोक अभियोजक कमलेश कुमार सिन्हा ने बताया कि, एडीजे कोर्ट में फर्जी प्रमाणपत्र पर ऑपरेशन करनेवाले बीके मिश्रा के खिलाफ संज्ञान लिया गया था। अदालत में सरकार की ओर से छह एवं बचाव पक्ष की ओर से तीन गवाहों की गवाही हुई।

उन्होंने बताया कि जून 1997 को बोधगया के प्रहंदा निवासी सरयू रविदास की पत्नी दुलारी देवी का ऑपरेशन किया गया था। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी थी। कुछ दिन बाद रुपये ऐंठने के लिए उसका पुन: ऑपरेशन किया गया। हालत बिगड़ने के बाद उसे मगध मेडिकल अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां उसकी मृत्यु हो गयी। उन्होंने बताया कि एक मृतक के देवर मनोज रविदास ने बीके मिश्रा और उनकी पत्नी उषा मिश्रा के खिलाफ डीएम एवं सीएस तक शिकायत की थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. खालिद हुसैन ने बोधगया थाना (चेरकी) कांड संख्या 45/98 में दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

उन्होंने बताया कि दोनों ने अवैध तरीके से ऑपरेशन किया था। उन्होंने गया-शेरघाटी रोड पर चेरकी बाजार में आरोग्य सेवा सदन एवं मेटरनिटी सेंटर का बोर्ड लगाया था। लेटर पैड में एमबीबीएस एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ लिखा था। चिकित्सा कार्य में दक्षता ज्ञान के बिना ऑपरेशन कर और रुपये भी ऐंठने का अपराध किया गया। बिना बेहोश किए फर्जी डाक्टर दंपती ने दो बार मरीज दुलारी देवी का ऑपरेशन कर दिया था। इलाज के दौरान उसकी मौत मगध मेडिकल अस्पताल में हो गई थी। बचाव पक्ष की ओर से वकील विनोद कुमार बहस कर रहे थे।