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झारखंड का बजट झूठ का पुलिंदा बिना स्वाद के खाने की तरह : हेमंत

रांची :नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा है कि बजट झूठ का पुलिंदा है़ सरकार के सारे दस्तावेज को देखेंगे, तो सच को छिपाने का प्रयास किया गया है़ लोगों को उम्मीद थी कि राहत मिलेगी लेकिन यह बजट बिना स्वाद के खाने की तरह है, जिसमें ना तो नमक है और ना ही मसाला़ श्री सोरेन बुधवार को विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बात कर रहे थे़

उन्होंने कहा कि झारखंड पहला राज्य है, जिसने जीएसटी लागू होने के बाद सबसे पहले बजट पेश किया है़ लेकिन इसमें नहीं बताया गया है कि केंद्र के पास सारी शक्ति जाने के बाद कैसे भरपाई करेंगे़ राजस्व का कितना नुकसान होगा, इसकी कोई चर्चा नहीं है़ श्री सोरेन ने कहा कि सरकार की योजनाएं दम तोड़ती नजर आ रही है़ं वित्तीय कुप्रबंधन इस सरकार में साफ दिख रहा है़ 184 योजनाओं की बात की गयी थी़ लेकिन सरकार बजट का पैसा खर्च नहीं कर पायी है़ सारा काम आधा अधूरा है़ सरकार को बताना चाहिए 15 सौ करोड़ रुपये कैसे खर्च करेंगे़ उन्होंने कहा कि जब उनकी सरकार थी, तो कृषि क्षेत्र में 17़ 62 प्रतिशत ऋण दिया गया़ इसे घटा कर वर्ष 2017 में 15़ 6 प्रतिशत कर दिया गया़ इस बजट से किसानों को कुछ हाथ लगने वाला नहीं है़ किसानों को भी ऋण यह सरकार नहीं देना चाहती है़

राम-राम की तरह, शिबू-हेमंत की रट लगाते हैं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि जब लोग मुश्किल में होते हैं तो जिस तरह राम-राम की रट लगाते हैं, वैसे ही मुख्यमंत्री शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन की रट लगाते है़ं हर जगह हम ही नजर आते है़ं हकीकत तो कुछ और ही है प्रतिपक्ष के नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री रोजगार की ऐसे बात करते हैं, जैसे रेवड़ी बांट रहे है़ं लेकिन सच कुछ और है़ 18 हजार 872 लोगों को कौशल विकास के तहत प्रशिक्षित करने की बात कही गयी है़

सरकार ने बताया है कि 5038 लोगों को नौकरी मिली़ इसमें से कितने लोगों ने नौकरी छोड़ दी होगी़ इसका डाटा सरकार के पास नहीं है़ उन्होंने कहा कि मुद्रा योजना का भी यही हाल है़ देश के स्तर पर औसतन एक युवक को 16 हजार रुपये ही मिलते है़ं उन्होंने कहा कि 11़ 50 लाख लोगों का राशन कार्ड रद्द कर दिया गया़ 12़ 50 लाख लोग मनरेगा में इनरॉल थे, लेकिन महज 27 हजार परिवारों को सरकार ने रोजगार दिया़ मौके पर विधायक कुणाल षाडंगी, योगेंद्र महतो और इरफान अंसारी भी मौजूद थे़