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दूध से ज्यादा जरूरी घर की इज्जत, शौचालय के लिए बेच दी गाय

गया [अमित कुमार सिंह]।स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत के तहत खुले में शौच से मुक्ति अभियान में जब लोगों को जागरूक किया जाने लगा तो तर्क और बहाने भी साथ-साथ चलने लगेे। पक्का मकान तो है, पर शौचालय नहीं। क्यों नहीं? जवाब होता है, पैसा नहीं है। लेकिन, तेतरी देवी जैसी वृद्ध महिला इसकी सफलता के उस ध्वजवाहक के रूप में खड़ी हैं, जो समाज को आईना दिखा रही हैं। उन्होंने घर की इज्जत को दूध से ज्यादा जरूरी समझा। इसलिए अपनी गाय बेच दी। वह गाय उनकी आय का जरिया थी।

बिहार के गया जिले में बाराचट्टी प्रखंड की सरमां पंचायत में एक गांव है तेवारीचक। तेतरी देवी यहीं की रहने वाली हैं। उनकी उम्र 70 वर्ष के करीब है। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। इंदिरा आवास योजना से बने घर में पति और बेटे-बहू के साथ रह रही हैं। वह जीविका समूह की अध्यक्ष भी हैं। बेटे की शादी की तो घर में मैट्रिक पास बहू आई।

तेतरी देवी कहती हैं कि बहू ने भी शौचालय पर जोर दिया। वह खुद इसे समझ रही थीं, पर पैसे का अभाव था। बहू ने अपना जेवर दिया तो मना कर दिया कि यह उसकी अमानत है। फिर गाय बेचने का फैसला किया। गाय चली गई तो अब पति को दूध नहीं दे पाती हैं। वह कहती हैं कि गाय तो फिर आ जाएगी, शौचालय जरूरी था। जागरूकता अभियान वाले भी बोलते थे तो अच्छा नहीं लगता था।

पूरा परिवार जुटा शौचालय निर्माण में

शौचालय बनाने के लिए ईंट, सीमेंट वगैरह चाहिए था। तेतरी देवी ने 14 हजार रुपये में गाय बेचकर पैसे का प्रबंध किया। अब वृद्ध पति व पूरा परिवार शौचालय निर्माण में जुट गया है। इस उम्र में वह स्वयं गड्ढे खोद रही हैं, मिट्टी उठा रही हैं। परिवार सहयोग कर रहा है। शौचालय निर्माण में यह उत्साह देखते ही बनता है। वह कहती हैं कि पति बीमार रहते हैं। गाय थी तो उन्हें दूध मिल जाता था।

पूरा परिवार जुटा शौचालय निर्माण में

अब दिक्कत तो हो गई है, पर पैसे मिलने पर गाय फिर आ जाएगी। चूंकि वह जीविका समूह की भी अध्यक्ष हैं तो पहले खुद शौचालय बनाना जरूरी था। तभी तो दूसरों को भी कह पाएंगी। यह सोच देश में चल रहे स्वच्छता अभियान के संदेश के सुदूर ग्रामीण इलाकों तक पहुंच पाने का एक उदाहरण है।

अब मिलेगा सम्‍मान:-गया के बाराचट्टी के प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रणव कुमार गिरि कहते हैं कि तेतरी देवी एक उदाहरण हैं। उनकी सोच अनुकरणीय है। पूरा वार्ड खुले में शौच से मुक्त हो जाने पर ही लाभुकों को राशि दी जाती है, पर उनके लिए शौचालय बनते ही भुगतान की अनुशंसा की है। उन्हें सम्मानित भी करेंगे।