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मिशन 2019 को लेकर दलों में शुरू हुई जोड़तोड़, गठबंधन में शामिल पार्टियों के बदलने लगे सुर

पटना [राज्य ब्यूरो]।आम चुनाव में अभी भले ही वर्ष भर समय शेष है लेकिन दलों के अंदर मिशन 2019 फतह करने को लेकर अभी से तोड़-जोड़ का दंगल शुरू हो गया है। एनडीए और यूपीए में गठबंधन मजबूत करने को लेकर सियासी बिसात भी बिछने लगी है। दरअसल, राजनीतिक दल मैदान में कूदने से पहले संगठन को दुरुस्त करने और कुनबा विस्तार में जुट गए हैं। इसी कड़ी में दलीय नेताओं के बीच अपनी राजनीतिक ताकत का एहसास कराने के लिए सम्मेलन और आयोजनों का सहारा लेने की होड़ भी दिखने लगी है। महज हफ्ते भर के अंदर जदयू का दामन थामने वाले आधा दर्जन नेताओं ने राजधानी पटना में दो बड़े आयोजन कर यह संदेश देने का भरसक प्रयास किया तो तीन दलों के दिग्गजों ने अपने गठबंधन के बोल-वचन और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर नेतृत्व के समक्ष चुनौती पेश कर दी है।

बयान के निहितार्थ से बढ़ी बेचैनी

बिहार और यूपी के उपचुनाव परिणाम से जनप्रतिनिधियों के बीच जातीय गुणा-गणित के आधार पर जीत के समीकरण को साधने की अभी से बेचैनी बढ़ गई है तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पार्टी के पिछले दो बड़े कार्यक्रम में दिए गए बयान के भी सियासी गलियारे में गंभीर निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।

लोजपा प्रमुख और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान टीडीपी के बहाने एनडीए नेतृत्व को नसीहत दे चुके हैं। रामविलास पासवान ने तो यहां तक कह दिया है कि राज्य व केंद्र सरकार अल्पसंख्यक हितों में पहले से अधिक काम कर रही हैं लेकिन लोगों के मन में यह धारणा है कि भाजपा अल्पसंख्यक विरोधी है। जन अधिकार पार्टी के संरक्षक पप्पू यादव की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात को लेकर भी कई मायने निकाले जा रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय द्वारा राजद-कांग्रेस के कई विधायकों के एनडीए के संपर्क में होने के संबंध में पिछले दिनों दिए गए बयान ने भी दोनो दलों की सामने चुनौती पेश कर दी है।