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बिहार : राज्य में समान शिक्षा प्रणाली लागू करने से ही हो सकता है बड़ा बदलाव, शिक्षकों की कमी दूर करे

पटना : बिहार में मूल्यपरक शिक्षा और उसके जरिये युवाओं को कुशल मानव संसाधन के रूप में विकसित कर राज्य को विकास के मार्ग पर ले जाया जा सकता है. इसके लिए जरूरी है कि राज्य की शैक्षिणक नीति में आमूल बदलाव हो. नीति के केंद्र में शिक्षा की गुणवत्ता हो. इसके लिए जरूरी है कि शिक्षा में विज्ञान और नैतिक मूल्यों को मजबूती दी जाये. शिक्षा को पूंजीवाद या बाजार के दबाब से मुक्त दिलायी जाये. ताकि सभी आय स्तर की प्रतिभाओं को ज्ञानार्जन के लिए बेहतर स्कूल और अवसर मिलें. यह तभी हो सकता है जब समान शिक्षा प्रणाली लागू की जाये. ताकि सभी वर्ग के बच्चे समान शैक्षणिक सुविधाओं और अवसरों को हासिल कर ग्लोबल समाज की ताकत बन सकें. दूसरे शब्दों में, बिहार की शिक्षा को आर्थिक असमानता और पूंजीवाद के भंवर से मुक्ति मिलनी जरूरी है. ताकि गरीब या निम्न मध्यमवर्गीय परिवार के प्रतिभाशाली बच्चे कुंठित न हों. अलबत्ता इसके लिए जरूरी है कि राज्य की शिक्षा प्रणाली व शैक्षणिक संस्थाओं में माहौल को सुधारा जाये. क्लास में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए टीचरों को अनुशासन के दायरे में लाया जाये.

दरअसल शिक्षक नियमित रूप से स्कूल आयेंगे, तभी बच्चे भी आयेंगे. इसके लिए शिक्षकों को मध्याह्न भोजन समेत अन्य गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने की जरूरत है. उन्हें सिर्फ अपने मूल कार्य ही करने दिया जाये. स्कूल-कॉलेजों में आधारभूत संरचना का समुचित विकास सुनिश्चत किया जा सके. शैक्षणिक कार्यक्रमों में नैतिक शिक्षा दी जाये. शैक्षणिक कैलेंडर को नियमित किया जाये. यह मानना है स्थानीय स्कूल-कॉलेजों के शिक्षक, विद्यार्थी व शिक्षाविदों का. उन्होंने रविवार को ‘प्रभात खबर’ कार्यालय में ‘बिहार में कैसे सुधरे शिक्षा का माहौल’ विषयक परिचर्चा में शिरकत की. यह आयोजन बिहार राज्य के 106वें स्थापना दिवस पर किया गया. वक्ताओं ने शिक्षा के क्षेत्र से राजनीति व व्यावसायिक हस्तक्षेप को भी दूर करने की वकालत की.

शिक्षकों की कमी दूर करे सरकार

वक्ताओं ने कई स्कूल-कॉलेजों का उदाहरण देते हुए कहा कि छात्र संख्या के अनुपात में शिक्षकों की संख्या मुट्ठी भर भी नहीं है. शिक्षक ही नहीं होंगे, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात बेमानी होगी. विज्ञान और गणित के शिक्षकों की कमी दूर की जाये. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार को पूरी ईमानदारी के साथ शिक्षकों को नियुक्ति करनी होगी. राजनीति व स्वार्थ को दरकिनार कर योग्य शिक्षकों की नियुक्ति करनी होगी. क्लास रूम से लेकर लैब व लाइब्रेरी तक को दुरुस्त करना होगा. वक्ताओं ने कहा कि आजादी के बाद से अब तक राज्य सरकार ने अपने विकास के एजेंडे में शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी है. उसमें गैर शैक्षणिक प्रदर्शन एक्टविटी शामिल की गयी है.अल्पकालिक प्रयोग किये गये हैं. जरूरी है कि भविष्य की जरूरतों के मद्देनजर जरूरी उपाए किये जाएं. इन 70 वर्षों में शिक्षा के विकास के लिए कई बेहतर सिफारिशें आयीं, लेकिन उसे कभी लागू ही नहीं किया गया. अत: राजनीतिक सोच से परे हट कर समाज व छात्रहित में शिक्षा को एजेंडे में प्रमुखता दी जानी चाहिए.