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पटना : नाम तूफान एक्सप्रेस, लेकिन चाल कछुए की, पहुंचती है 30 घंटे लेट, जानें क्यों यह ट्रेन रास्ते म

पटना :नाम तूफान (उद्यान आभा) एक्सप्रेस, पर चाल कछुए की. यह एक्सप्रेस देश के उन ‘अभागे’ ट्रेनों में शुमार है, जो सालों से विलंब ही चलती रही है. तूफान एक्सप्रेस खुलती तो सही समय पर है, लेकिन अपने गंतव्य पर समय पर नहीं पहुंच पाती है. यह औसतन न्यूनतम सात घंटे और अधिकतम तीस घंटे लेट रहती है. श्रीगंगानगर से हावड़ा के बीच की 1978 किलोमीटर की दूरी पार करने के लिए यह ट्रेन 112 स्टेशनों से गुजरती है. पटना स्टेशन को सालों से इंतजार है कि यह ट्रेन कब समय पर पहुंचेगी. श्रीगंगानगर-हावड़ा के बीच रनिंग टाइम करीब 45 घंटे की है.

अचानक रद्द भी की जाती है ट्रेन

सामान्य दिनों में तूफान एक्सप्रेस पांच से आठ घंटे विलंब रहती है. लेकिन, कुहासा शुरू होते ही 20 से 30 घंटे विलंब होने लगती है. विलंब परिचालन से यात्री परेशान नहीं हो, इसको लेकर रेलवे प्रशासन तूफान एक्सप्रेस को अचानक रद्द भी कर देता है. रेलवे प्रशासन ने दिसंबर, 2017 से फरवरी 20018 के बीच लगातार इस ट्रेन को रद्द कर दिया था.

ट्रेन संख्या 13008 श्रीगंगानगर-हावड़ा तूफान एक्सप्रेस(एक माह की स्थिति)

श्रीगंगानगर 80 प्रतिशत फेरे निर्धारित समय से रवाना पटना जंक्शन 0 प्रतिशत फेरे समय से पहुंची पटना जंक्शन विलंब शत प्रतिशत फेरे 5 से 15 घंटे की देरी ट्रेन संख्या 13008 श्रीगंगानगर-हावड़ा तूफान एक्सप्रेस(एक वर्ष की स्थिति) श्रीगंगानगर 67.58 प्रतिशत फेरे निर्धारित समय से रवाना पटना जंक्शन 1.10 प्रतिशत फेरे 15 से 30 मिनट की देरी से पहुंची पटना जंक्शन विलंब 65.66 शत प्रतिशत फेरे 5 से 30 घंटे की देरी रद्द रही ट्रेन 33.24 प्रतिशत फेरे रद्द रही ट्रेन संख्या 13007 हावड़ा- श्रीगंगानगर तूफान एक्सप्रेस(एक माह की स्थिति) हावड़ा 80 प्रतिशत फेरे निर्धारित समय से रवाना पटना जंक्शन 13.33 प्रतिशत फेरे 15 से 30 मिनट की देरी से पहुंची पटना जंक्शन विलंब 46.67 शत प्रतिशत फेरे तीन से आठ घंटे की देरी ट्रेन संख्या 13007 हावड़ा-श्रीगंगानगर तूफान एक्सप्रेस(एक वर्ष की स्थिति)

हावड़ा 47.95 प्रतिशत फेरे निर्धारित समय से रवाना

टना जंक्शन 3.56 प्रतिशत फेरे 15 से 30 मिनट की देरी से पहुंची पटना जंक्शन विलंब 50.96 शत प्रतिशत फेरे 4 से 14 घंटे की देरी रद्द रही ट्रेन 32.88 प्रतिशत फेरे रद्द रही समय पर खुलती जरूर, पर पहुंचती नहीं तूफान निर्धारित समय पर न पटना जंक्शन पहुंची और न हावड़ा. पिछले एक सप्ताह का आंकड़ा देखें तो श्रीगंगानगर से ट्रेन शत प्रतिशत निर्धारित समय से खुली, लेकिन पटना जंक्शन छह से साढ़े सात घंटे की देरी से पहुंची. अक्तूबर, 2017 से दिसंबर 2017 तक 18 से 30 घंटे की देरी से पटना जंक्शन पहुंची. दूसरी तरफ हावड़ा से खुलने वाली तूफान एक्सप्रेस भी हावड़ा से शत प्रतिशत निर्धारित समय से रवाना हुई.

हावड़ा 47.95 प्रतिशत फेरे निर्धारित समय से रवाना

यह ट्रेन एक जून, 1930 को तूफान एक्सप्रेस के नाम से चलायी गयी. यह ट्रेन तूफान की स्पीड से हावड़ा-श्रीगंगानगर आती-जाती थी. पटना जंक्शन होते हुए ट्रेन 1978 किलोमीटर की दूरी तय करने के साथ साथ 112 स्टेशनों पर अपने शुरुआती दिनों से रुक रही है. कोयला इंजन से चलती थी तो तूफान की स्पीड में चलती थी. लेकिन, अब जब रेलवे ट्रैक को मजबूत किया गया, ट्रैक से अवरुद्ध हटाया गया और कोयला इंजन से इलेक्ट्रिक इंजन कर दिया गया, बावजूद इसके यह सिर्फ नाम की तूफान एक्सप्रेस रह गयी है.

क्यों यह ट्रेन रास्ते में होती है विलंब :-श्रीगंगानगर से तूफान एक्सप्रेस दिल्ली, आगरा कैंट, टुंडला, कानपुर सेंट्रल, इलाहाबाद, मुगलसराय होते हुए पटना व हावड़ा पहुंचती है. श्रीगंगानगर से ट्रेन निर्धारित समय से रवाना होती है और आगरा कैंट और टुंडला तक अमूमन एक-डेढ़ घंटे ही विलंब रहती है. लेकिन, यहां के बाद ट्रेन विलंब होना शुरू हो जाता है, जो हावड़ा तक विलंब ही रहता है. दिल्ली-पटना रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव अधिक है. इससे विलंब से पहुंची ट्रेनों को रोक कर समय से चल रही ट्रेनों को पास कराया जाता है.