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सावधान ! गैस व दर्द की दवाएं कर रहीं आपकी किडनी को खराब, इन दवाओं का इस्‍तेमाल है घातक

पटना : पेट में गैस व दर्द सुनने में तो बहुत आम सी बीमारी लगती है. लेकिन, अगर इस पर ध्यान न दिया जाये, तो परेशानी बढ़ भी सकती है. एसीडीटी से सिर में दर्द, बेचैनी और घबराहट होने का डर भी रहता है. लेकिन, मरीज बिना डॉक्टरी सलाह के ही दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, नतीजा उनकी किडनी खराब हो रही हैं. इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में किडनी ट्रांसप्लांट के बाद डॉक्टरों ने इसका खुलासा किया है. डॉक्टरों ने कहा है कि अगर ये दवा लगातार खा रहे हैं, तो डॉक्टर से इसके बारे में पूरी जानकारी ले लें.

इस तरह से बचें बीमारी से

-डॉक्टर की देखरेख के बिना लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में दवाओं का उपयोग करने से किडनी खराब होने की आशंका ज्यादा रहती है -लंबे समय तक ऐसी दवा का इस्तेमाल करने, जिसमें कई दवाएं मिली हों, उनसे किडनी को क्षति पहुंच सकती है -बड़ी उम्र, किडनी डिजीज, डायबिटीज और शरीर में पानी की मात्रा कम हो, तो ऐसे मरीजों में दवाओं का अधिक उपयोग खतरनाक हो सकता है

ये दवाएं कर रहीं किडनी खराब

बुखार, शरीर और जोड़ों में छोटे-मोटे दर्द के लिए डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेना आम चलन बन गया है. बिना परामर्श की दवा लेने के कारण किडनी खराब होने के मामलों में अधिकांश ऐसी दवाएं हैं जिन को खाने से डॉक्टरों ने मना कर दिया है. आइब्यूप्रोफेन, कीटोप्रूफेन, डाइक्लोफेनाक सोडियम, नीमुस्लाइड आदि ऐसे कई दवाएं हैं जिनकी वजह से किडनी खराब हो रही हैं.

बिना सलाह न लें दवा

आईजीआईएमएस में पिछले दो साल में 36 मरीजों की किडनी का ट्रांसप्लांट किया जा चुका है. ट्रांसप्लांट करनेवाले डॉक्टरों का कहना है कि इन 36 में 18 ऐसे मरीज हैं, जिनकी किडनी दवाओं के गलत इस्तेमाल की वजह से खराब हुई है. इनमें अधिकांश ऐसे मरीज हैं, जिनको एसीडीटी जैसी बीमारी थी और उन्होंने बिना डॉक्टरी सलाह दवाओं का इस्तेमाल किया. दवाओं के साइट इफैक्ट की वजह से इन मरीजों के दोनों किडनी में खराबी पायी गयी. क्या कहते हैं अधिकारी पीपीआई के खतरे एसीडीटी से राहत पाने के लिए अधिकांश मरीज पीपीआई (प्रोटॉन पंप इनहिबिटर्स) की दवा का इस्तेमाल कर लेते हैं, जो ठीक नहीं है. गैस के लिए पीपीआई आराम पहुंचाने की बजाय नुकसान पहुंचा सकती है. पीपीआई के सेवन से खून में मैग्नीशियम की कमी हो जाती है. खून पर असर पड़ने से किडनी पर भी इसका गलत प्रभाव पड़ सकता है. एसीडीटी होने पर बेचैनी होने लगती है जिसमें दवा लेना जरूरी हो जाता है. एक बार डॉक्टर से परामर्श जरूर लेनी चाहिए, जिससे राहत भी मिल जाये और सेहत पर बुरा प्रभाव भी न पड़े.

बिना सलाह न लें दवा

बिना डॉक्टर की सलाह के न लें पेन किलर आईजीआईएमएस में अब तक कुल 36 किडनी ट्रांसप्लांट किये जा चुके हैं. इनमें आधे ऐसे मरीज हैं जिनकी किडनी दवाओं के अधिक इस्तेमाल की वजह से खराब हुई है. ऐसे में अगर मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के अधिक दवाएं खासकर पेन किलर, एसीडीटी आदि दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इससे बचे.