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बिहार : नहीं चेते तो बिहार की मिट्टी हो जायेगी बेकार...जानें कैसे

पटना :रासायनिक खाद, कीटनाशकों और रासायनिक दवाओं के अंधाधुंध प्रयोग ने मिट्टी की सेहत खराब करके रख दी है. फिर भी किसान नहीं चेत रहे. मिट्टी को नुकसान पहुंचाने वाले रासायनिक खादों का इस्तेमाल कर रहे हैं. फिलहाल बिहार पंजाब के रास्ते पर है, जिसकी सबसे ज्यादा हालात खराब है. इसका सीधा असर इसकी लागत पर पड़ेगा. उत्पादन में और गिरावट आयेगी. मिट्टी के नमूनों के विश्लेषण ने चिंता में डाला : बिहार के सभी जिलों से मिट्टी के नमूने लिये गये थे. इनकी जांच हुई तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आये. मिट्टी में जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती जा रही है. नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, आॅर्गेनिक कार्बन, पीएच की स्थिति ठीक नहीं है.

बिहार के विभिन्न जिलों से लिये गये 266722 नमूनों में से करीब 70 प्रतिशत में नाइट्रोजन की मात्रा सामान्य से कम मिली थी. 29 प्रतिशत में सामान्य तो 0.69 प्रतिशत में मात्रा ज्यादा मिली. इसी तरह 266722 नमूनों की जांच हुई तो फॉस्फोरस की मात्रा भी चिंताजनक मिली. 42 प्रतिशत में सामान्य से कम और 0.84 प्रतिशत में सामान्य से अधिक फॉस्फोरस की मात्रा मिली. 57 प्रतिशत में स्थिति सामान्य मिली. 266722 नमूनों में से 8.90 प्रतिशत में पोटेशियम की मात्रा सामान्य से कम मिली. 86.71 में सामान्य और 4.39 फीसदी में सामान्य से अधिक पोटेशियम की मात्रा मिली है. 266722 नमूनों में ऑर्गेनिक कार्बन की जांच हुई. इसमें से करीब 28 प्रतिशत में सामान्य से कम, 48 प्रतिशत में सामान्य और 23 प्रतिशत में सामान्य से कम मात्रा मिली है.

घट रही उर्वरा शक्ति, फसल उत्पादन में गिरावट हर साल खत्म हो रही है 5334 लाख टन मिट्टी

जमीन खराब हो रही है. इससे हर साल 5334 लाख टन मिट्टी खत्म हो रही है. केंद्रीय मृदा और जल संरक्षण अनुसंधान संस्थान देहरादून की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है. जानकार बताते हैं, तेजी से खत्म हो रही उपजाऊ मिट्टी से कृषि की उत्पादकता भी प्रभावित हो रही है. बिहार में 32052 मिट्टी के सैंपल लिये गये थे. इसकी जांच हुई तो 14085 में जिंक की मात्रा सामान्य से कम, 4991 में सामान्य और 12976 में सामान्य से ज्यादा मिली. यह खतरे की घंटी से कम नहीं है. ये हैं उपाय : ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर जैसे गोबर की खाद, कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट, नैैडप कंपोस्ट, हरी खाद का ज्यादा प्रयोग करें. बायो फर्टिलाइजर जैसे राइजोबियम, एजेटो बैक्टर, पीएसबी, पीएमबी के इस्तेमाल से भी पोषक तत्व की मात्रा सुधरेगी.

मृदा स्वास्थ्य कार्ड बेहतर प्रयास

फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए मिट्टी में 17 पोषक तत्वों की जरूरत होती है. इनमें से अगर कोई कम या ज्यादा हुआ तो पैदावार प्रभावित होती है. मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसी खेत विशेष की माटी यानी मृदा के पोषक तत्वों की स्थिति बताता है. उसकी उर्वरा शक्ति में सुधार के लिए जरूरी पोषक तत्वों की उचित मात्रा की सिफारिश किसानों को करता है. इससे किसानों को खेत की मिट्टी की प्रकृति की जानकारी भी मिलती है.

मृदा स्वास्थ्य कार्ड बेहतर प्रयास