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बिहार : स्कूल में शिक्षक पीते हैं शराब, खाली बोतल लेकर सड़क पर उतरे बच्चे, ग्रामीणों ने विद्यालय में

सहरसा :यह कैसी शराबबंदी जब शराब नहीं पीने की शपथ लेनेवाले शिक्षकों ने स्कूल में बैठ कर शराब पीनी शुरू कर दी. इतना ही नहीं, स्कूल के बच्चों से सिगरेट और गुटखा मंगाया जाता है. लाने से इन्कार करने पर बच्चों के साथ मारपीट की जाती है. सोमवार को बच्चों ने जब लाने से मना कर दिया, तो शिक्षकों ने उन्हें स्कूल से निकाल दिया. इसकी जानकारी मिलते ही मंगलवार को बच्चों के अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा. वे बच्चों के साथ सड़क पर उतर आये. काफी देर तक हंगामा हुआ. यह मामला नवहट्टा प्रखंड के आदर्श मध्य विद्यालय का है. सोमवार को शिक्षकों द्वारा बच्चों को डांट-फटकार कर विद्यालय से बाहर निकाल दिया गया था.

विद्यालय पोषक क्षेत्र वार्ड सदस्य सह प्रबंध समिति अध्यक्ष विक्रम कामत ने बताया कि बच्चों को विद्यालय से लगभग 12 बजे दिन में ही निकाल दिया गया. उन्हें यह बताया गया कि पढ़ाई नहीं होगी, तुम लोग घर चले जाओ. पता करने पर शिक्षकों ने बताया कि हमलोगों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है. इसलिए आज से बच्चों को नहीं पढ़ायेंगे. ग्रामीणों ने विद्यालय में की तालाबंदी : मंगलवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने बच्चों के साथ विद्यालय में तालाबंदी कर दी और कहा कि जब तक वरीय अधिकारी द्वारा विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर कार्रवाई नहीं की जायेगी, हमलोग स्कूल खुलने नहीं देंगे.

सूचना पर पहुंचे थानाप्रभारी द्रवेश कुमार ने मामले की जानकारी ली. मौके पर थानाप्रभारी ने लोगों को समझा-बुझा कर हटाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. बच्चों ने कहा कि शिक्षक क्लास रूम में शराब पीते हैं. ग्रामीणों ने क्लास रूम से शराब की बोतल और गिलास लेकर राजनपुर-कर्णपुर पथ को जाम कर प्रदर्शन किया. घंटों हो-हंगामे के बाद प्रखंड प्रमुख शमीम अख्तर पप्पू, बीडीओ चंद्रमोहन पासवान, बीईओ राजेंद्र पांडे एवं कई अन्य जनप्रतिनिधियों ने पहुंच कर आक्रोशित लोगों को शांत करा जाम हटाया. सभी ने विद्यालय परिसर में बैठक कर शैक्षणिक व्यवस्था पर भड़ास निकाली और प्रधानाध्यापक की क्लास ली. छात्र-छात्राओं ने वर्ग कक्ष से शराब की कई बोतलें एवं प्लास्टिक के गिलास एवं सूखी मछली अधिकारी और जनप्रतिनिधि को दिखायी. बच्चों ने कहा कि हम लोग क्लास में बैठ कर पढ़ते रहते हैं. उस समय हमें शिक्षक द्वारा दुकान से सिगरेट व गुटखा खरीद कर लाने को कहा जाता है. नहीं जाने पर मारते-पीटते हैं.

आक्रोशित अभिभावक व अन्य जनप्रतिनिधियों ने प्रधानाध्यापक को हटा कर किसी अन्य शिक्षक को प्रधानाध्यापक बनाने की मांग की. जनप्रतिनिधि एवं पदाधिकारी ने समझा-बुझाकर विद्यालय खुलवाया और पठन-पाठन शुरू कराया.