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बिहार : पीडीएमसी व सीइओ की हुई खिंचाई, लगा "60 लाख का जुर्माना, 1 माह में दिखाना होगा काम, वरना छुट्

भागलपुर : एक सितंबर 2017 से काम शुरू करनेवाली एक्सपर्ट एजेंसी पीडीएमसी ने तय टाइमलाइन में स्मार्ट सिटी की एक भी योजना का जमीनी खाका नहीं खींच पायी. इस पर स्मार्ट सिटी के निदेशक मंडल ने मंगलवार को आयोजित बैठक में न सिर्फ पीडीएमसी व कंपनी के सीइओ सह नगर आयुक्त की फजीहत की, बल्कि पीडीएमसी पर 60 लाख से अधिक का जुर्माना भी ठोक दिया. निदेशक मंडल की बैठक में प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने योजनाओं की समीक्षा की, जिसमें प्रगति शून्य पायी गयी. निदेशक मंडल ने विभिन्न कामों के टाइम लाइन में फेल रही पीडीएमसी को अब एक माह की मोहलत दी है. इसमें कंपनी को योजनाओं की रूप-रेखा तैयार कर निदेशक मंडल के समक्ष प्रस्तुत करना है.

पीडीएमसी के काम की अब निदेशक मंडल के सदस्य निदेशक सह जिलाधिकारी आदेश तितरमारे सीधे मॉनीटरिंग करेंगे. वे नियमित तौर पर कंपनी सीइओ सह नगर आयुक्त के साथ पीडीएमसी के काम की डेवलपमेंट रिपोर्ट की समीक्षा करेंगे. यह निर्णय प्रमंडलीय आयुक्त सह कंपनी अध्यक्ष श्री कुमार ने बैठक में लिया. बोर्ड की समीक्षा के दौरान पीडीएमसी के साथ-साथ कंपनी सीइओ सह नगर आयुक्त श्याम बिहारी मीणा को कमिश्नर ने एक तरह से अंतिम चेतावनी दी है. पीडीएमसी से कहा, एक महीने में अगर योजनाओं पर अपनी प्लानिंग को अंतिम रूप नहीं देते हैं, तो उन्हें हटाने (अनुबंध टर्मिनेशन) की कार्रवाई होगी. सीइओ से कहा कि एक महीने के दौरान विभिन्न योजना को सिरे चढ़ते हुए आरएफपी अपलोड करवाएं, जिससे टेंडर शुरू हो सके. पीडीएमसी से यह राशि उनके अनुबंध की राशि से कटौती होगी. बैठक में निदेशक मंडल के सदस्य निदेशक में नगर विकास व आवास विभाग के विशेष सचिव संजय दयाल, वित्त विभाग के उप सचिव अजय कुमार ठाकुर, डीएम आदेश तितरमारे व सीइओ श्याम बिहारी मीणा उपस्थित थे. वहीं बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में स्मार्ट सिटी की योजना को तैयार करने वाली पीडीएमसी

डीएम की जवाबदेही : देंगे निदेशक मंडल को रिपोर्ट

कंपनी के निदेशक मंडल को अगली समीक्षा बैठक में स्मार्ट सिटी के काम को लेकर डीएम आदेश तितरमारे जवाब देंगे. डीएम से ही चयनित योजना पर क्या-क्या काम हुआ और उसमें किस तरह की अड़चनें आ रही हैं, पर निदेशक मंडल जानकारी लेगा. डीएम द्वारा कंपनी सीइओ सह नगर आयुक्त से तमाम कामों को कराया जायेगा.

अब आगे की क्या है राह

कंपनी एक्ट के तहत काम में फेल रहने पर पीडीएमसी के खिलाफ तीन प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी. पहले चरण में सामान्य रूप से चेतावनी, दूसरे चरण में काम के अनुसार नोटिस आॅफ सस्पेंशन ऑफ पेमेंट (जो एक बार हो चुका है) तथा तीसरे चरण में टर्मिनेशन नोटिस है. एक माह बाद तीसरे चरण का काम होने की संभावना है. नगर आयुक्त पर बढ़ी जवाबदेही कंपनी एक्ट में स्मार्ट सिटी के सीइओ सह नगर आयुक्त को बोर्ड ने सीइओ मनोनीत किया है. अगर सीइओ स्तर से काम को सही तरह से करवाने में विफलता होती है, तो निदेशक स्तर से मॉनीटरिंग होगी.

अब आगे की क्या है राह

स्मार्ट सिटी परियोजना से कोई भी काम शहर में शुरू नहीं होने की बात पर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित कर प्रभात खबर याद दिलाता रहा है. यह योजना लागू हो, इसे लेकर अभियान के रूप में लगातार समाचार प्रकाशित किया जा रहा है.

अब तक योजनाओं की क्या है स्थिति:-रिवर फ्रंट डेवलपमेंट में सर्वे का काम हुआ है. बाद में यह विचार किया गया कि अब सर्वे किये गये जमुनिया धार के तट पर नहीं, बल्कि गंगा के किनारे विकसित किया जायेगा. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट अभी तक हुई बैठकों में सिर्फ चर्चा तक ही सीमित है. स्मार्ट रोड एंड स्ट्रीट और हेरिटेज वाक योजना भी पदाधिकारियों की बैठकों तक ही सीमित रही.