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बंदूक चलाने वाले हाथ बजाते हैं बांसुरी, इस जेल में रहते हैं रफी और मुकेश

पटना [चंद्रशेखर]।कभी उनके हाथों में बंदूकें रहती थीं, जिनसे तड़ातड़ गोलियां बरसती थीं और जान चली जाती थीं, लेकिन आज उन्हीं हाथों ने बांसुरी थाम ली है और उसकी तान सुनकर लोग विश्वास नहीं कर पाते कि ये वही हाथ हैं जो खून से रंगे थे। एेसे लोग जिनके भय से मोहल्ले के लोग घरों में कैद हो जाते थे, वो आज मुकेश और मोहम्मद रफी की आवाज में गाना गा रहे हैं। ये हुनरमंद हैं पटना के केंद्रीय कारागार बेऊर जेल में अपने गुनाहों की सजा काट रहे कुछ कैदी, जिनकी प्रतिभा के कायल आज जेल के आम कैदी ही नहीं, कारा प्रशासन का भी दिल जीत रहे हैं।

आदर्श केंद्रीय कारा बेऊर के संगीत विद्यालय में एक से एक गायक ही नहीं, बल्कि आधुनिक वाद्य यंत्रों को बजाने वाले म्यूजिशियन भी आपको सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे और फिर अपराह्न दो बजे से शाम पांच बजे तक रोजाना रियाज करते मिल जाएंगे। यह अलग बात है इनकी प्रतिभा से समाज अभी वाकिफ नहीं है, लेकिन बड़ी बात यह है कि संगीत से लगाव रखने वाले ये अधिकांश कैदी हत्या या अन्य बड़े जघन्य अपराधों के लिए बेऊर जेल में सजा काट रहे हैं। पटना शहर के रहने वाले पंकज के डर से कभी मोहल्ले के लोग सामने आने से भी कतराते थे।

हत्या के मामले में जेल में बंद पंकज मोहम्मद रफी की सुरीली आवाज में जब गाना गाते हैं तो जेल के तमाम कैदी मंत्रमुग्ध होकर उनका गाना सुनते रहते हैं। वहीं, दूसरे कैदी सुधीर जब मुकेश कुमार की आवाज में गाने लगते हैं तो जेल के समस्त कैदी उनका सुरीला गाना सुनने दौड़े चले आते हैं। गजेंद्र शर्मा नेपाल में रेडियो जॉकी था। उसके गानों के कई कैसेट भी बाजार में मौजूद हैं और वह भोजपुरी के अच्छे गायक माने जाते हैं, लेकिन वो भी दूसरे कैदियों की तरह बेऊर जेल में सजा काट रहे हैं। एक अन्य कैदी मुकेश कुमार अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में सजायाफ्ता होकर जेल में बंद है। जब वह भोजपुरी में गाना गाने लगता है तो पूरा माहौल बंध जाता है। उसका गाना सुनने के बाद पता चलता है कि वह अपनी पत्नी से कितना प्यार करता था। रियाज के बाद भी वह खाली समय में जेल के किसी कोने में बैठकर अपनी पत्नी की याद में बांसुरी बजाता रहता है।