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जीतनराम मांझी, बिहार के एेसे राजनेता, जो अपने बयानों से लाते रहते हैं भूचाल

पटना [काजल]। हम के अध्यक्ष जीतनराम मांझी बिहार के एकमात्र एेसे नेता हैं जो अपने बयानों से बिहार की राजनीति में भूचाल लाते रहते हैं। कभी वो किसी की तारीफ के कशीदे पढ़ने लगते हैं तो दूसरे ही पल उसकी तमाम बुराईयों को भी सबके सामने लाकर रख देते हैं। आज उन्होंने फिर अपने फैसले से बिहार के राजनीतिक गलियारे में एक नया भूचाल ला दिया है। मांझी ने एनडीए का साथ छोड़ विपक्षी महागठबंधन का दामन थामने का एेलान क्या किया? बिहार की राजनीति एक बार फिर से गरमा गई है। जीतनराम मांझी के बयान और उनकी कार्यशैली हमेशा से दुविधाओं पर टिकी रही है। वो सुबह कुछ कहते हैं और शाम में कुछ कहते नजर आते हैं।

क्या है वजह

एनडीए के सहयोगी दल रहे हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी गठबंधन में उचित स्थान न दिए जाने से काफी समय नाराज चल रहे थे। वह समय-समय पर इसको लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर कर चुके थे। यही नहीं, उन्होंने कई मुद्दों पर केन्द्र व राज्य सरकार को भी कठघरे में खड़ा किया था। यही नहीं उन्होंने यह भी एलान किया था कि हम अपनी आठ मार्च की रैली में एनडीए के लोगों को नहीं बुलाएंगे।

उपचुनाव के सीट बंटवारे से थे ज्यादा नाराज

बता दें कि हम अध्यक्ष जीतनराम मांझी बिहार उपचुनाव में जहानाबाद से टिकट नहीं मिलने से नाराज चल रहे थे और लगातार अपने बयानों से सबको चौंकाते रहे हैं। कभी तो वे एनडीए की तारीफ करने लगते हैं और उपचुनाव का प्रचार करने की हामी भरते हैं तो कभी अपना बयान बदलकर एनडीए को अपना गुस्सा दिखाते रहे।लेकिन आखिरकार आज मांझी का गुस्से और सब्र का बांध टूट ही गया और उन्होंने एनडीए का साथ छोड़ विपक्ष का दामन थामने की घोषणा कर ही दी। जहानाबाद से उपचुनाव का टिकट नहीं मिलने से नाराज मांझी ने पहले ही इसके संकेत दे दिए थे कि वो लालू यादव की दोस्ती कबूल कर सकते हैं।

लालू से हाथ मिलाने की संभावना जता मचाया था बवाल

भाजपा की तरफ से लगातार उपेक्षा की ख़बरों के बीच जीतन राम मांझी ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी । राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से गठबंधन के सवाल पर उन्होंने बेबाकी से कहा राजनीति में कुछ भी संभव है।लेकिन जब राज्यसभा की सीटों के लिए चुनाव का एलान हुआ और वहां भी अपनी पूछ नहीं होती देख उन्होंने एनडीए से नाता तोड़ना सही समझा। मांझी ने कुछ दिनों पहले कहा था कि आगामी 8 अप्रैल को पटना मे लाखों की भीड़ होगी और हम तख्तापलट देंगे। मांझी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, 'आने वाले समय में आप अपनी एकता का परिचय दें, तभी यह सरकार हमारी बात सुनेगी।'

लालू से हाथ मिलाने की संभावना जता मचाया था बवाल

यही नहीं, मांझी ने कहा, ‘जब बाबू वीर कुंवर सिंह ने 80 वर्ष की उम्र में तलवार उठा ली थी तो मेरी उम्र तो अभी 73 वर्ष की ही है। अब हम भी तलवार उठा लेंगे। सरकार सतर्क हो जाए। सिर्फ किसानों और मजदूरों की भलाई की बात करने से कुछ नहीं होगा बल्कि किसानों और मजदूरों को उनका हक देना होगा।’

आज जीतनराम मांझी ने बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता राबड़ी देवी से मुलाकात के बाद एनडीए से नाता तोड़ने का एलान कर दिया है। मांझी ने राबड़ी देवी से मुलाकात के बाद मीडिया के सामने आकर इस संबंध में औपचारिक घोषणा की। इस दौरान पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव भी उनके साथ रहे। राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि जीतनराम मांझी उनके माता-पिता के पुराने दोस्त हैं और वो उनका महागठबंधन में स्वागत करते हैं